Who is Parvesh Verma who defeated Arvind Kejriwal: जिस आम आदमी पार्टी की आंधी में पिछले दो विधानसभा में किसी पार्टी को विपक्ष बनने लायक सीटें नहीं मिली थी, उसे बीजेपी ने इस बार 2025 के विधानसभा के चुनाव में करारी मात दी है। न सिर्फ आम आदमी पार्टी के हाथों से दिल्ली की सत्ता फिसली है बल्कि इसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल खुद अपनी सीट हार गए। अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25,864 मतों से हराकर जीत हासिल की थी और अब पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे परवेश वर्मा ने 4089 मतों से मात दी है।
दिल्ली के पूर्व सीएम के बेटे हैं Parvesh Verma
48 वर्षीय परवेश वर्मा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। उनके चाचा आजाद सिंह उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर थे और 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी के टिकट पर मुंडका विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। परवेश वर्मा ने आरके पुरम के दिल्ली पब्लिक स्कूल और किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए किया। उनकी शादी पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के बीजेना नेता विक्रम वर्मा की बेटी स्वाति सिंह से हुआ है।
संपत्ति की बात करें तो उन्होंने अपने पास 77.89 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 12.19 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति घोषित की है। उनकी पत्नी के पास 17.53 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 6.91 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। उन्होंने 2.2 लाख रुपये का कैश बैलेंस दिखाया। इसके अलावा उनके पास तीन कारें हैं - एक 9 लाख रुपये की टोयोटा फॉर्च्यूनर, एक 36 लाख रुपये की टोयोटा इनोवा और एक 11.77 लाख रुपये की एक्सयूवी।
परवेश वर्मा 2013 विधानसभा चुनाव के लिए दिल्ली भाजपा चुनाव समिति के सदस्य थे। उस साल हुए विधानसभा चुनाव में महरौली सीट से जीत हासिल की। उन्होंने उस समय आम आदमी पार्टी के नरिंदर सिंह सेजवाल के साथ-साथ तत्कालीन विधायक और दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष योगानंद शास्त्री को हराया था। 2014 को लोकसभा चुनाव में वह वेस्ट दिल्ली लोकसभा सीट से 2,68,586 मतों के भारी अंतर से जीते। इसके बाद 2019 के चुनाव में भी कांग्रेस के महाबल मिश्र को 5.78 लाख मतों के भारी अंतर से हराया। उस चुनाव में उन्हें 14,41,601 पड़े मतों में से 8,65,648 वोट मिले थे जो दिल्ली की किसी भी लोकसभा सीट पर जीते गए कैंडिडेंट के लिए रिकॉर्ड मार्जिन था।