बिहार में विधानसभा की 243 सीटों के लिए 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होने वाला है और उसके नतीजे 14 नवंबर को आने वाले हैं।

देश से सबसे बड़े सूबों में से एक बिहार में नवंबर में चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने जा रहा है। क्योंकि इस चुनाव में महागठबंधन और एनडीए के साथ-साथ प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी ताल ठोक रही है। बिहार में 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा और चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को आने वाले हैं। बिहार में विधान सभा की कुल 243 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए मैजिक नंबर 12...
| State | Seats | Dates |
|---|---|---|
| बिहार | 243 | 6 नवंबर |
| बिहार | 243 | 11 नवंबर |
West Bengal Exit Polls: अगर पिछले चुनाव की बात करें, तो 2021 में TMC ने 215 सीटें जीतकर 48% वोट हासिल किए थे, जबकि BJP को 77 सीटें और 38% वोट मिले थे। इस बार कई एग्जिट पोल BJP की जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं, हालांकि सीटों के आंकड़े अलग-अलग हैं। सिर्फ दो सर्वे- People’s Pulse और JVC ने TMC की वापसी की बात कही है
Apr 30, 2026 08:35 pm
Today's Chanakya Exit Poll: यह आंकड़े 'टुडेज चाणक्य' के राजनीतिक शोध पर आधारित हैं। इसमें मार्जिन ऑफ एरर रखा गया है। अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो असम की सत्ता में बीजेपी की पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी
Assam Exit Poll Result: इस एग्जिट पोल से साफ है कि असम में 'हिमंता फैक्टर' काम कर गया है । अगर ये नतीजे वास्तविक परिणामों में बदलते हैं, तो यह असम में बीजेपी का अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन होगा और वो बिना किसी सहयोगी दल के भी सरकार चलाने की स्थिति में होगी
लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में भी इस बार एनडीए बढ़त हासिल कर सकती है। News18 के ओपिनियन पोल के मुताबिक, राज्य की कुल 42 सीटों में से NDA को 25 सीटों पर जीत मिल सकती है, जबकि I.N.D.I.A गठबंधन को एक भी सीट मिलने की संभावना नहीं है। तृणमूल कांग्रेस को 17 सीटें मिल सकती हैं। जहां तक वोट प्रतिशत का सवाल है, तो NDA को 42 पर्सेंट वोट मिल सकते हैं
भारत में होने वाले विधानसभा चुनाव राज्य स्तर पर सरकार चुनने की प्रक्रिया है। इसके माध्यम से राज्य की जनता अपने प्रतिनिधि (MLA - विधायक) चुनती है। जिस दल या गठबंधन को विधानसभा की कुल सीटों में से आधे से अधिक (बहुमत) सीटें मिलती हैं, वह राज्य में सरकार बनाता है और उसका नेता मुख्यमंत्री बनता है। यह चुनाव सामान्यतः हर 5 साल में आयोजित किए जाते हैं।
भारत के संविधान के अनुसार, विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए। वह किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में एक पंजीकृत मतदाता (Voter) होना चाहिए। वह सरकार के अधीन किसी 'लाभ के पद' (Office of Profit) पर नहीं होना चाहिए। वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो और न्यायालय द्वारा अयोग्य घोषित न किया गया हो।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act) के अनुसार, एक व्यक्ति एक ही समय में अधिकतम 2 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ सकता है। अगर वह दोनों सीटों पर जीत जाता है, तो उसे एक निश्चित समय के भीतर एक सीट छोड़नी पड़ती है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62(5) के अनुसार, जेल में बंद व्यक्ति (विचाराधीन कैदी या सजायाफ्ता) मतदान नहीं कर सकता। हालांकि, चुनाव लड़ने के मामले में नियम अलग हैं। अगर किसी व्यक्ति को 2 साल या उससे अधिक की सजा हुई है, तो वह रिहाई के 6 साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ सकता। लेकिन अगर मामला विचाराधीन है और व्यक्ति जेल में है, तो वह चुनाव लड़ सकता है।
NOTA (None of the Above) यानी 'इनमें से कोई नहीं'। यह विकल्प उन मतदाताओं के लिए है जो अपने चुनाव क्षेत्र के किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं करते। NOTA का बटन दबाकर मतदाता किसी भी उम्मीदवार को वोट न देने के अपने अधिकार का प्रयोग कर सकता है। हालांकि, तकनीकी रूप से NOTA के वोट चुनाव परिणाम को रद्द नहीं करते (भले ही NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलें, दूसरे नंबर वाले उम्मीदवार को ही विजेता माना जाता है), लेकिन यह राजनीतिक दलों को बेहतर उम्मीदवार उतारने का संदेश देता है।

वर्ष 2026 भारतीय राजनीति के लिए अहम साल हैं। इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय दलों के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट भी साबित होंगे।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। 2021 की प्रचंड जीत के बाद, TMC के सामने अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले चुनावों की तुलना में अधिक आक्रामक होकर सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे इस बार भी चुनाव के केंद्र में रहने की संभावना है।
दक्षिण भारत में तमिलनाडु और केरल के चुनाव बेहद दिलचस्प होंगे। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाला DMK गठबंधन अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद कर रहा है। वहीं, एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी।
केरल में वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) ने 2021 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचा था। क्या मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तीसरी बार 'एंटी-इनकंबेंसी' को मात दे पाएंगे या कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF सत्ता में वापसी करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
असम में बीजेपी अपनी विकासोन्मुख नीतियों और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों के साथ तीसरे कार्यकाल की उम्मीद करेगी। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिलेगा।
साल 2026 के ये चुनाव राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच शक्ति संतुलन को पुनर्परिभाषित करेंगे। जहां एक ओर बीजेपी अपने दक्षिण विस्तार की रणनीति पर जोर देगी, वहीं विपक्षी दल क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेंगे। इन चुनावों के नतीजे आगामी वर्षों के लिए भारत के राजनीतिक विमर्श को नई दिशा देंगे।