Malda Gherao Case: 'चुनाव आयोग अधिकारियों की सुरक्षा करने में विफल रहा'; SC की फटकार के बाद मालदा बंधक मामले में बोलीं ममता बनर्जी

Malda Gherao Case: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय बताया। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ममता बनर्जी ने मालदा घेराव मामले के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया

अपडेटेड Apr 02, 2026 पर 3:36 PM
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सूबे का सियासी महौल गरमा गई है।

Malda Gherao Case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा जिले में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा करने में नाकाम रहने पर चुनाव आयोग (ECI) को दोषी ठहराया। वोटर लिस्ट से नामों को हटाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने SIR में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों का बुधवार (2 अप्रैल) को कई घंटे तक घेराव किया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने उन्हें बचाया।

मुर्शिदाबाद जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, "निर्वाचन आयोग न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा करने में विफल रहा, जिसकी मैं निंदा करती हूं।" बनर्जी ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद नागरिक प्रशासन और पुलिस प्रशासन में अपने ही अधिकारियों को तैनात किया है।

उन्होंने निर्वाचन आयोग पर कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित कई अधिकारियों को बदल दिया।


मुख्यमंत्री ने कहा, "मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं, मैंने ऐसा निर्वाचन आयोग पहले कभी नहीं देखा।" बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा की योजना बंगाल में विधानसभा चुनाव रद्द करवाकर राष्ट्रपति शासन लागू करवाना है। रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, "BJP में सांप्रदायिक लोग हैं। कुछ सांप्रदायिक लोग हमारे बीच भी घुस आए हैं।"

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना का गुरुवार को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय बताया। साथ ही निष्क्रियता को लेकर राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य अधिकारियों से जवाब देने को कहा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग को इस घटना की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराए जाने का अनुरोध करने की अनुमति दी।

पीठ ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और जारी चुनावी प्रक्रिया को रोकने के लिए एक सोचा-समझा एवं निहित स्वार्थों से प्रेरित कदम प्रतीत होती है। CJI ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था तंत्र ध्वस्त हो गया है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।

सुप्रीम कोर्ट को खुद स्थिति पर नजर रखनी पड़ी

CJI ने कहा कि मालदा जिले में तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को असामाजिक तत्वों ने बंधक बना लिया था। उन्होंने कहा कि बुधवार देर रात तक उन्हें खुद स्थिति पर नजर रखनी पड़ी। शीर्ष अदालत ने इस घटना के संबंध में मीडिया की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की खुलेआम की गई कोशिश है बल्कि इस न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है।

पीठ ने कहा कि वह किसी को भी न्यायिक अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक हमला करने के लिए कानून अपने हाथ में लेने और हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगी। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि एसआईआर कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों, उनके परिवारों और अन्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग की जाए।

कई घंटों तक बंधक रहे अधिकारी

अधिकारियों ने बताया था कि SIR प्रक्रिया में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों का मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने के विरोध में मालदा जिले में कई घंटों तक घेराव किया गया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पहले न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की मांग की। लेकिन अंदर जाने की अनुमति नहीं दिए जाने पर उन्होंने बुधवार को शाम चार बजे के आसपास प्रदर्शन शुरू किया और परिसर का घेराव किया। अधिकारियों ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान दो महिला न्यायिक अधिकारी भी कार्यालय के अंदर फंसी हुई थीं।

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