SIR को लेकर CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहती हैं ममता बनर्जी! TMC अलग-अलग पार्टियों से करेगी चर्चा

तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से वोटर लिस्ट सुधार का तरीका गलत है। उन्होंने कहा, “हम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि SIR को जिस तरह से चलाया जा रहा है, वो गलत है और इससे देश के हर नागरिक के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ता है

अपडेटेड Feb 03, 2026 पर 8:53 PM
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SIR को लेकर CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहती हैं ममता बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कहा है कि वो दूसरे राजनीतिक दलों से बातचीत करेगी और पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (इम्पीचमेंट) की संभावना पर चर्चा करेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच दिल्ली में तीखी बहस हुई थी।

तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से वोटर लिस्ट सुधार का तरीका गलत है। उन्होंने कहा, “हम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि SIR को जिस तरह से चलाया जा रहा है, वो गलत है और इससे देश के हर नागरिक के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ता है।”


इससे पहले ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जानबूझकर तृणमूल विधायकों वाले इलाकों में ज्यादा मतदाताओं के नाम काट रहा है।

उन्होंने कहा, “जहां बीजेपी के विधायक हैं, वहां सिर्फ 3,000 से 4,000 नाम हटाए जा रहे हैं। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के विधायकों वाले क्षेत्रों में 40,000 से लेकर 1 लाख तक नाम हटाए जा रहे हैं।”

ममता बनर्जी ने बताया कि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 40,000 मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं और लक्ष्य एक लाख नाम हटाने का है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना चुनाव अधिकारियों से सलाह लिए ड्राफ्ट मतदाता सूची से 58 लाख नाम हटा दिए। उन्होंने यह भी कहा कि “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के नाम पर लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं और यहां तक कि अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को भी सुनवाई के लिए बुलाया गया।

तृणमूल कांग्रेस के इस कदम से विपक्षी गठबंधन INDIA में भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को चुनौती दी जानी चाहिए। हालांकि, किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के महाभियोग के लिए संसद में भारी बहुमत से प्रस्ताव पास होना जरूरी होता है।

वहीं, चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, ताकि मतदाता सूची साफ और सही बनी रहे। आयोग ने किसी भी तरह के राजनीतिक पक्षपात से इनकार किया है।

दिल्ली बैठक में हंगामा

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रहीं और गुस्से में मेज पर हाथ भी मारा। वहीं, चुनाव आयोग के तीनों शीर्ष अधिकारी शांत और संयमित बने रहे।

बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की दिल्ली यात्रा को “ड्रामेबाजी” बताया।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ने ममता बनर्जी को कानून के राज के बारे में समझाया और कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों ने यह भी दावा किया कि बैठक में मौजूद कुछ तृणमूल विधायक चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपशब्द और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा पहले भी आयोग के दफ्तरों और ढांचों को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने साफ कहा कि SIR के काम में किसी भी तरह का दबाव, रुकावट या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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