पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार वोटिंग प्रतिशत बहुत अहम मुद्दा बन गया है। इसी के आधार पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी अपनी-अपनी जीत की संभावना का आकलन कर रही हैं। दोनों ही पार्टियां वोटिंग के आंकड़ों को अपने हिसाब से अलग-अलग तरीके से समझा रही हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, गुरुवार को हुए पहले चरण के मतदान में राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर वोटिंग हुई। इस दौरान करीब 3.60 करोड़ मतदाताओं में से 92.7% लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो काफी ज्यादा माना जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा वोटिंग
पहले चरण के मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में वोट डाले गए। अब तक के रुझानों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ज्यादा वोटिंग को अक्सर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है। इस पार्टी का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि तृणमूल कांग्रेस की जमीनी पकड़ मजबूत है और उसकी कई योजनाएं सीधे लोगों तक पहुंचती हैं, जिससे उसे वोटरों का अच्छा समर्थन मिलता है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा वोटिंग
सबसे अधिक वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर जिले में 94.4 प्रतिशत हुई है. कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत वोटिंग हुई है। बीरभूम में 93.2 प्रतिशत मतदान हुआ है। जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में भी 92.7 प्रतिशत वोटिंग हुई है। मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं और इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं का कहना है कि पहले चरण में हुई भारी वोटिंग पार्टी के लिए अच्छे संकेत दे रही है। उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि लोग पार्टी की सरकार और उसकी योजनाओं से संतुष्ट हैं और उनका समर्थन लगातार बना हुआ है। टीएमसी नेताओं का यह भी दावा है कि इस बार बड़ी संख्या में महिलाओं और सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने वाले लोगों ने मतदान किया है। इससे पार्टी का जनाधार और मजबूत हुआ है। हावड़ा में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि पहले चरण की वोटिंग से साफ हो गया है कि टीएमसी को इस बार भारी बहुमत मिलेगा। उन्होंने कहा कि अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में भारतीय जनता पार्टी का खाता भी नहीं खुलेगा। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि करीब 93% वोटिंग होना इस बात का संकेत है कि लोग मतदाता सूची के “SIR” के खिलाफ अपना गुस्सा दिखा रहे हैं।
बीजेपी को सत्ता परिवर्तन की उम्मीद
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना है कि ज्यादा वोटिंग इस बात का संकेत है कि लोग राज्य सरकार से नाराज हैं। पार्टी का मानना है कि खासकर शहरी इलाकों और सीमा से जुड़े जिलों में अधिक मतदान होने से उसके उम्मीदवारों को फायदा मिल सकता है। कोलकाता के पास पानीहाटी में एक रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बदलाव की लहर पहले से दिख रही थी, और पहले चरण की वोटिंग ने इस बात को और मजबूत कर दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पक्ष में मिला यह समर्थन उनकी जीत की शुरुआत है।
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिर्फ ज्यादा वोटिंग से नतीजे तय नहीं होते। कई बार ज्यादा मतदान से मजबूत संगठन वाली पार्टियों जैसे तृणमूल कांग्रेस को फायदा मिलता है, लेकिन यह कड़ी टक्कर वाली सीटों पर विपक्ष के मजबूत होने का संकेत भी हो सकता है। आखिरकार, नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि किस इलाके में किस तरह का मतदान हुआ—जैसे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र, शहरी सीटें और वे जिले जहां चुनाव प्रचार ज्यादा तेज रहा।
चुनाव में एक और अहम बात जिस पर नजर रखी जा रही है, वह है पहली बार वोट डालने वाले युवा और महिलाओं की भूमिका। पिछले कुछ चुनावों में इनकी भागीदारी लगातार बढ़ी है। खासकर कड़ी टक्कर वाली सीटों पर इनके वोट किसी भी पार्टी की जीत-हार तय कर सकते हैं। राज्य में दूसरे चरण का मतदान 29 मई को होगा। वहीं 4 मई को वोटों की गिनती की जाएगी, जिसके बाद नतीजे सामने आएंगे। फिलहाल सिर्फ वोटिंग प्रतिशत के आधार पर यह कहना मुश्किल है कि कौन जीतेगा, लेकिन इतना तय है कि इससे तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुकाबला और भी दिलचस्प और तेज़ हो गया है।