West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट में लगभग 13 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग (ECI) के एक शीर्ष अधिकारी ने कोलकाता में बुधवार (25 मार्च) को बताया कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया के दौरान विचाराधीन कैटेगरी में रखे गए मतदाताओं में से 32 लाख की जांच की गई। उनमें से 40 प्रतिशत का नाम हटा दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि वास्तविक आंकड़ों में परिवर्तित करने पर न्यायिक प्रक्रिया के बाद हटाए गए मतदाताओं की संख्या वर्तमान में 13 लाख है।
इसके साथ ही बंगाल में कुल हटाए गए वोटरों की संख्या करीब 76 लाख हो गई है। अधिकारी ने पुष्टि की UW कि राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान पहले ही लगभग 63 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। इन आंकड़ों के साथ अब मतदाता सूची में जगह नहीं पाने वाले मतदाताओं की कुल संख्या बढ़कर लगभग 76 लाख हो गई है।
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को उन विचाराधीन मतदाताओं की पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की थी, जिनकी सुनवाई पूरी हो गई थी। और वे पात्र पाए गए थे। लेकिन सूची से हटाए गए नामों की संख्या या उस लिस्ट में निपटाए गए मामलों की सटीक संख्या की जानकारी नहीं दी जिसे लेकर विभिन्न धड़ों ने उसकी आलोचना की है।
SIR प्रक्रिया के तहत गणना चरण में मृत्यु, प्रवास, दोहराव और अनुपयोगिता के आधार पर कुल 58 लाख नाम हटाए गए थे। इससे राज्य के पात्र मतदाताओं की संख्या प्रारंभिक 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई थी। एसआईआर के बाद 28 फरवरी को जारी फाइनल वोटर लिस्ट में कुल मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गई, जिनमें 60 लाख से अधिक नामों को न्यायिक सीमक्षा के लिए विचाराधीन की कैटेगरी में रखा गया था।
अधिकारी ने बताया कि अब तक विचाराधीन 32 लाख मतदाताओं के मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। जबकि राज्य में वर्तमान में कार्यरत 705 न्यायिक अधिकारियों द्वारा लगभग 28 लाख मामलों का निपटारा किया जाना बाकी है। अधिकारी ने बताया कि सोमवार को पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट के प्रकाशन के दौरान निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर लगभग 10 लाख नाम अपलोड किए गए थे।
उन्होंने लेकिन यह भी कहा कि सूची में हटाए गए नामों की सटीक संख्या के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ)मनोज अग्रवाल ने सप्लीमेंट्री लिस्ट के प्रकाशन से पहले बताया था कि करीब 29 लाख विचाराधीन मतदाताओं के मामलों का निस्तारण किया जा चुका है।
अधिकारी ने कहा, "प्रकाशित सूची में केवल उन्हीं नामों को शामिल किया जा सकता है जिन्हें ई-हस्ताक्षर प्रमाणीकरण प्रक्रिया के माध्यम से अनुमोदित किया गया हो।" इस बीच, सीईओ ने पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट को दैनिक रूप से प्रकाशित करने की अनुमति के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 27 मार्च के बाद होगी।