Mamata Banerjee vs ECI: चुनाव आयोग के खिलाफ कलकत्ता HC पहुंचे TMC नेता, अधिकारियों के तबादले के आदेश को चुनौती

West Bengal Elections 2026: TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने शुक्रवार (20 मार्च) को कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग की तरफ से कई IAS और IPS अधिकारियों के तबादले के आदेश पर सवाल उठाया

अपडेटेड Mar 20, 2026 पर 3:30 PM
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West Bengal Elections 2026: एक तृणमूल नेता ने आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है

West Bengal Elections 2026: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता एवं वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद कई भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के तबादले के निर्वाचन आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए शुक्रवार (20 मार्च) को कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। सांसद बनर्जी ने इस मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पक्षकार प्रतिवादी बनाया है।

वकील ने चीफ जस्टिस सुजॉय पाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए याचिका पर शीघ्र सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया। इस मामले से जुड़े एक वकील ने कहा कि इस याचिका पर संभवतः अगले सप्ताह की शुरुआत में सुनवाई होगी। याचिका में तबादले का निर्णय लिए जाने से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य सरकार से सलाह नहीं लेने पर सवाल उठाए गए हैं।

पश्चिम बंगाल में 15 मार्च को विधानसभा चुनावों की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया था। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। जबकि मतों की गिनती चार मई को होगी।


ममता ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले शीर्ष नौकरशाहों और आईपीएस अधिकारियों के रातोंरात तबादला किए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधने के कुछ घंटों बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर ECI के कामकाज पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कड़े शब्दों में लिखे अपने आठवें पत्र में बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग शिष्टाचार और संवैधानिक मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ गया है।

मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही निर्वाचन आयोग पर स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, "निर्वाचन आयोग के कामकाज से मैं स्तब्ध हूं, जो मेरे हिसाब से शालीनता और संवैधानिक औचित्य की सभी सीमाओं को पार कर गया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है। जमीनी हकीकत या जनता के कल्याण की जरा भी परवाह नहीं की है।"

लेटर में सुप्रीम कोर्ट का जिक्र

ममता ने इस मुद्दे पर अपनी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करने के कदम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने चिंताओं को स्वीकार किया है। साथ ही निर्देश जारी किए हैं जिन्हें वर्तमान में लागू किया जा रहा है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कई जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों समेत कई वरिष्ठ राज्य अधिकारियों का एकतरफा तबादला कर दिया था।

उन्होंने कहा, "चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद, बिना किसी ठोस कारण के और चुनावी नियमों या आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के किसी भी आरोप के बगैर ही बड़े पैमाने पर ये तबादले किए गए हैं।" उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के मौजूदा SIR के दौरान जिला चुनाव अधिकारियों के तबादले स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित प्रतीत होते हैं। उन्होंने इससे लंबित मामलों के निपटारे को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।

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चुनाव वाले अन्य राज्यों में राज्य पुलिस अधिकारियों को पर्यवेक्षकों के रूप में तैनात करने पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने इस कदम को मनमाना और अधिकार का दुरुपयोग करार दिया। सीएम ने आरोप लगाया कि यह आयोग द्वारा गंभीर रूप से अधिकार का दुरुपयोग दर्शाता है।

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