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West Bengal: हुमायूं कबीर ने निशा चटर्जी की जगह अबुल हसन चौधरी को बनाया उम्मीदवार, क्या धर्म बना वजह?

हुमायूं कबीर की पार्टी में निशा चटर्जी को बल्लीगंज से उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा के बाद काफी चर्चा हुई थी। निशा को पार्टी का इकलौता 'ब्राह्मण चेहरा' बताया जा रहा था। लेकिन यह घोषणा ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। 24 घंटे के भीतर ही हुमायूं कबीर ने उनका टिकट वापस ले लिया और नए उम्मीदवार के तौर पर अबुल हसन चौधरी का नाम घोषित कर दिया

Suresh Kumarअपडेटेड Dec 25, 2025 पर 4:44 PM
West Bengal: हुमायूं कबीर ने निशा चटर्जी की जगह अबुल हसन चौधरी को बनाया उम्मीदवार, क्या धर्म बना वजह?
West Bengal: हुमायूं कबीर ने निशा चटर्जी की जगह अबुल हसन चौधरी को बनाया उम्मीदवार, क्या धर्म बना वजह?

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीति लगातार नए मोड़ ले रही है। TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की नई पार्टी 'जनता उन्नयन पार्टी (JUP)' अपने उम्मीदवारों की घोषणा को लेकर विवादों में है। दअरसल, यह मामला बल्लीगंज विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां पार्टी ने पहले इस सीट से सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर निशा चटर्जी को उम्मीदवार बनाया। लेकिन, 24 घंटे के भीतर ही उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी। और, अब उनकी जगह अबुल हसन चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया है। इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या निशा की उम्मीदवारी सिर्फ इसलिए रद्द की गई क्योंकि वह हिंदू-ब्राह्मण परिवार से आती हैं।

हुमायूं कबीर की पार्टी में निशा चटर्जी को बल्लीगंज से उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा के बाद काफी चर्चा हुई थी। निशा को पार्टी का इकलौता 'ब्राह्मण चेहरा' बताया जा रहा था। लेकिन यह घोषणा ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। 24 घंटे के भीतर ही हुमायूं कबीर ने उनका टिकट वापस ले लिया और नए उम्मीदवार के तौर पर अबुल हसन चौधरी का नाम घोषित कर दिया।

अबुल हसन चौधरी को लेकर हुमायूं ने कहा कि वे उनके चाचा हैं और कोलकाता पुलिस में अधिकारी रह चुके हैं। फिलहाल वे सेवानिवृत्त हैं और राजनीति में नए हैं। हुमायूं का कहना है कि राजनीति सिर्फ पेशेवर नेताओं के लिए नहीं होती। उन्होंने कहा, "वह राजनेता नहीं हैं, लेकिन क्या हर किसी का राजनीति करना जरूरी नहीं है? हम राजनीति करेंगे, चाहे पहले नेता रहे हों या नहीं।"

वहीं दूसरी ओर निशा चटर्जी इस फैसले से बेहद नाराज है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उन्हें सिर्फ इसलिए हटाया गया क्योंकि वह हिंदू-ब्राह्मण परिवार से आती हैं। निशा का कहना है कि जब उन्हें मंच पर बुलाकर उम्मीदवार घोषित किया गया, तब उनके निजी जीवन या सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया गया। बाद में अचानक उनके चरित्र और व्यवहार को मुद्दा बनाकर टिकट छीन लिया गया। उन्होंने कहा, "हुमायूं अंकल कभी कुछ कहते हैं, कभी कुछ। उन्होंने मेरा करियर दांव पर लगा दिया।"

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