West Bengal SIR Row: चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के बाद वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। ये हटाए गए नाम राज्य के 7.6 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 11.9% हैं, जो SIR की शुरुआत से पहले मौजूद थे। 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 63.66 लाख नाम (जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3% हैं) हटाए गए थे। इससे मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई थी।
इन 7.04 करोड़ मतदाताओं में 60.06 लाख ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिन्हें 'विवेचनाधीन' कैटेगरी में रखा गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में इन 60.06 लाख में से 27.16 लाख विवेचनाधीन मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। वहीं, इस कैटेगरी के 32.68 लाख से अधिक मतदाताओं को बरकरार रखते हुए फाइनल लिस्ट में शामिल किया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक कुल मिलाकर लगभग 90.83 लाख नाम हटाए गए हैं। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "SIR प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से की गई है। पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब जिले-वार आंकड़े सार्वजनिक कर दिए गए हैं।"
उन्होंने बताया कि 60.06 लाख 'विवेचनाधीन' मतदाताओं में से 59.84 लाख का डेटा सार्वजनिक किया जा चुका है। जबकि बाकी के 22,163 मामलों का निस्तारण हो चुका है। लेकिन अभी E-सिग्नेचर होना बाकी है। अधिकारी ने पीटीआई से कहा, "ई-हस्ताक्षर सहित समस्त लंबित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नाम हटाने और जोड़ने के आंकड़ों में मामूली बदलाव संभव है।"
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित गाइडलाइंस के अनुरूप की गई है। इस चरण पर किसी भी नए नाम को शामिल करना कानूनी प्रावधानों तथा सक्षम प्राधिकरण के निर्देशों पर निर्भर करेगा। इस बीच, फाइनल पूरक लिस्ट जारी होने के साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए वोटर लिस्ट सोमवार आधी रात के बाद नियमों के अनुसार फ्रीज कर दी गई है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा। जबकि शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण के लिए वोटर लिस्ट 9 अप्रैल को 'फ्रीज' की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "इस चरण में वोटर लिस्ट में कोई और नाम शामिल नहीं किया जाएगा।
पहले चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख के बाद लिस्ट कानून के अनुसार फ्रीज हो चुकी है।" उन्होंने कहा कि अब किसी भी बदलाव का फैसला सुप्रीम कोर्ट के संभावित निर्देशों पर निर्भर करेगा। SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई 13 अप्रैल को करेगा।
अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम हटाए गए: ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्य में SIR के बाद मतदाता सूचियों से मतुआ और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। नदिया जिले के चकदाहा में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिनके नाम एसआईआर की प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।
बनर्जी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट में उनके दखल के बाद, निर्णय के लिए विचाराधीन लगभग 60 लाख मामलों में से लगभग 32 लाख नाम सूचियों में बहाल कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, "खास समुदायों..मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे थे।"