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नहीं गिराया जाएगा Satyajit Ray का कथित घर, बांग्लादेश सरकार ने लिया ये फैसला

भारत के महान फिल्म मेकर्स में से एक सत्यजीत रे 'पाथेर पंचाली' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। 1992 में भारत रत्न से सम्मानित रे का घर ढहाए जाने की खबरें सोशल मीडिया में तैर रही हैं। अब बांग्लादेश सरकार ने इस पर अपना पक्ष रखा है और इसे नहीं गिराने का फैसला किया है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 18, 2025 पर 7:51 PM
नहीं गिराया जाएगा Satyajit Ray का कथित घर, बांग्लादेश सरकार ने लिया ये फैसला

बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच हाल ही में फिल्मी दुनिया की नामी हस्ती सत्यजीत रे का पुश्तैनी गिराने की खबर से दोनों देशों के बीच हड़कंप मच गया था। लेकिन अब खबर आ रही है कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका के हरिकिशोर रोड स्थिति फिल्ममेकर सत्यजीत रे के पुश्तैनी घर को नहीं गिराया जाएगा।

इस मामले में भारत सरकार ने पहले करते हुए इस घर को न गिराने की अपील की है और इसकी मरम्मत और रखरखाव में मदद करने का प्रस्ताव दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार से सत्यजीत रे के पुश्तैनी घर को बचाने की अपील की थी। ममता ने भारत सरकार से भी इस मामले में दखल देने को कहा था।

सोशल मीडिया में आ रही खबरों में ढाका के हरीकिशोर रे चौधरी रोड पर स्थित सत्यजीत रे का यह मकान उनके दादा प्रसिद्ध साहित्यकार उपेंद्र किशोर रे चौधरी का बताया जा रहा है। इस घर को लगभग 100 पहले बनाया गया था। 1947 के बंटवारे के बाद इस पर सरकार का कब्जा हो गया था। इह दावों के बाद सक्रिय हुई भारत सरकार ने बांग्लादेश की यूनुस सरकार से घर को न तोड़ने की अपील की थी।

बांग्लादेश सरकार की तरफ से बताया गया है कि जिस मकान को सत्यजीत रे का पुश्तैनी घर कहा जा रहा था, दरसअल वह उनका नहीं है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वह मकान सत्यजीत रे के दादा उपेंद्रकिशोर चौधरी का है। बांग्लादेश सरकार ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश सरकार के आर्काइव रिकॉर्ड की विस्तृत जांच से ये साफ होता है कि बताया जा रहा घर सत्यजीत रे का नहीं है। यह मकान एक जमींदार शशिकांत आचार्य चौधरी का है। उन्होंने ये घर सत्यजीत रे के पुश्तैनी मकान ‘शशि लॉज’ के पास अपने कर्मचारियों के लिए बनाया था। जमींदारी प्रथा खत्म होने के बाद यह मकान सरकार के नियंत्रण में आ गया। बाद में इसे बांग्लादेश महिला एवं शिशु अकादमी का दे दिया गया। मकान ख्स्ताहाल होने की वजह से अकादमी इसे गिराकर नई इमारत बनाना चाहती थी, इसलिए इसे ध्वस्त किया जा रहा था।

हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इस घर को न गिराने की भारत की अपील को मान लिया है। भारत सरकार ने इस घर को बंगाली सांस्कृतिक नवजागरण का प्रतीक मानते हुए, इसे ध्वस्त न करने की अपील की थी। साथ ही इसे एक लिटरेचर म्यूजियम के तौर पर बनाने का सुझाव दिया था। भारत इसे दोनों देशों की साझा संस्कृति का प्रतीक बनाना चाहता है। साथ ही, भारत की ओर से कहा गया कि इस मामले में नई दिल्ली ढाका के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है। भारत सरकार का अनुरोध बांग्लादेश सरकार मान लिया है। वह इस घर को फिलहाल नहीं गिराएगी।

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