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Rashmi Desai: टीवी स्टार रश्मि देसाई ने 8 साल तक झेला डिप्रेशन, बोलीं- 'भावनात्मक बोझ ने जिंदगी मुश्किल बना दिया'

Rashmi Desai: टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री रश्मि देसाई ने हाल ही में अपने जीवन का बेहद निजी और कठिन पहलू साझा किया है। उन्होंने बताया कि वह करीब आठ साल तक डिप्रेशन से जूझती रहीं और इस दौरान उन्हें भारी इमोशनल बैगेज का सामना करना पड़ा।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 13, 2026 पर 10:36 AM
Rashmi Desai: टीवी स्टार रश्मि देसाई ने 8 साल तक झेला डिप्रेशन, बोलीं- 'भावनात्मक बोझ ने जिंदगी मुश्किल बना दिया'

टीवी इंडस्ट्री की चहेती एक्ट्रेस रश्मि देसाई ने हाल ही में अपनी जिंदगी के सबसे काले दौर को खुलकर बयां किया। टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि आठ साल तक डिप्रेशन की चपेट में रहीं, जहां इमोशनल बैगेज ने उन्हें तोड़ दिया था। लेकिन काम ने ही उन्हें वापस पटरी पर लाया, जो उनका सेफ स्पेस बन गया।

रश्मि ने भावुक होकर कहा, "एक समय था जब मैं आठ साल तक डिप्रेशन में डूबी रही। मेरे ऊपर इतना बोझ था कि सब कुछ कम करके दोबारा शुरू करने में सालों लग गए। उतार-चढ़ाव खुद तय करते हैं, कोई और नहीं। काम ने मुझे शांति दी, ये मेरा एस्केप वर्ल्ड था जिसका अहसास बहुत देर से हुआ। अब दोनों तरफ बैलेंस बना रही हूं।" उन्होंने बताया कि हाई-लो के बीच उन्होंने प्रोफेशनल और इमोशनल लाइफ को संतुलित किया। 'उतरन' और 'दिल से दिल तक' जैसी सीरियल्स से घर-घर पहचान बनाने वाली रश्मि के लिए ये दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था।

रश्मि ने ये भी खुलासा किया कि शुरुआती दिनों में 16 साल की उम्र में कास्टिंग काउच का शिकार बनी थीं। बॉलीवुड हंगामा को पुराने इंटरव्यू में बताया था कि "ऑडिशन के नाम पर बुलाया, बेहोश करने की कोशिश की। किसी तरह भागी और मां को सब बताया।" डिप्रेशन के अलावा एक्ट्रेस पर कर्ज का पहाड़ भी टूट चुका है। बेघर होने और कार में सोने जैसे हालात भी झेल चुकीं हैं। रश्मि के करियर को बिग बॉस 13, खतरों के खिलाड़ी 6, नच बलिए 7, झलक दिखला जा जैसे शोज ने नई उड़ान दी है।

आज 39 साल की रश्मि मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देती हैं। उनका कहना है कि काम से हीलिंग मिली, जो भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया बना चुका है। रश्मि ने यह भी कहा कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी है। लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं या इसे कमजोरी मानते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को दी जाती है।

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