AI Impact Summit में दिखाए गए एक रोबोटिक डॉग को लेकर Galgotias University चर्चा में आ गई है। सोशल मीडिया पर आरोप लगे कि चीन में बने रोबोट को “स्वदेशी इनोवेशन” बताकर पेश किया गया। हालांकि यूनिवर्सिटी ने इसे “कम्युनिकेशन एरर” यानी बोलने में हुई गलती बताया है। ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने 18 फरवरी को कहा कि यह विवाद “develop” और “development” शब्दों के उलझाव से पैदा हुआ।
उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी ने रोबोट खुद नहीं बनाया, बल्कि उसे खरीदकर उस पर रिसर्च और डेवलपमेंट का काम किया। गौर ने साफ कहा, “हमने इसे डेवलप नहीं किया, बल्कि इसके डेवलपमेंट पर काम किया है। छात्रों के रिसर्च के लिए रोबोट खरीदा गया था।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर यह चीन से खरीदा गया है, तो भी इसका उद्देश्य सिर्फ एकेडमिक रिसर्च था।
क्या सरकार ने कोई कार्रवाई की?
रजिस्ट्रार ने बताया कि यूनिवर्सिटी को समिट स्थल खाली करने का कोई सरकारी निर्देश नहीं मिला है। यूनिवर्सिटी अभी भी एक्सपो में हिस्सा ले रही है।
रोबोटिक डॉग को समिट में पेश करने वाली नेहा सिंह ने भी पूरे मामले को “गलत समझ” बताया। उन्होंने कहा कि वह स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में कम्युनिकेशन फैकल्टी हैं, AI विभाग का हिस्सा नहीं।
उनके मुताबिक, “शायद मैं अपनी बात सही तरह से समझा नहीं पाई, और इसी वजह से सोशल मीडिया पर मामला बढ़ गया।”
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
एक वायरल वीडियो में नेहा सिंह ‘Orion’ नाम के रोबोटिक डॉग का डेमो देती नजर आईं। इसमें बताया गया कि यह रोबोट कैंपस में पेट्रोलिंग करता है और तंग जगहों में जाकर तस्वीरें ले सकता है।
वीडियो वायरल होने के बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में यूनिवर्सिटी के दावों पर सवाल उठाए गए।
चीन की कंपनी से मिलती-जुलती मशीन
समिट में दिखाया गया रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics के मॉडल जैसा बताया गया। यह रोबोट Unitree Go2 से मिलता-जुलता है, जो वैश्विक बाजार में करीब 2,800 डॉलर (लगभग 2.3 लाख रुपये) में बिकता है।
फिलहाल यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह सिर्फ शब्दों की गलतफहमी थी, न कि किसी तरह का झूठा दावा।
अब देखना होगा कि जांच या आगे की प्रतिक्रिया में क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और अकादमिक दावों की पारदर्शिता पर नई बहस जरूर खड़ा कर चुका है।