पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी नतीजों के बाद विपक्षी राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। एक तरफ बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़ा झटका लगा, वहीं तमिलनाडु में एमके स्टानिल की DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता से बाहर हो गया है। ऐसे माहौल में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी और स्टालिन के साथ खड़े होकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
अखिलेश यादव ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह ममता बनर्जी और एमके स्टालिन के साथ दिखाई दिए। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा- “हम वो नहीं हैं जो मुश्किल समय में साथ छोड़ दें।” उनके इस बयान को कांग्रेस पर तंज के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि तमिलनाडु में कांग्रेस ने DMK से गठबंधन तोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का फैसला किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश इस संदेश के जरिए दो निशाने साध रहे हैं। पहला, वे अपनी छवि एक ऐसे नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय दलों के साथ मजबूती से खड़ा है। दूसरा, यह कांग्रेस के लिए भी एक संकेत है कि क्षेत्रीय पार्टियां अब एक-दूसरे के साथ ज्यादा सहज और एकजुट महसूस कर रही हैं। अखिलेश यादव का यह रुख गठबंधन धर्म को निभाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उनका ये पोस्ट 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी अहम है, जहां ये देखने दिलचस्प होगी कि अखिलेश यादव कांग्रेस या इंडिया गठबंधन के साथ मिल कर चुनाव लड़ेंगे या अकेले ही BJP का मुकाबला करने मैदान में उतरेंगे।
वैसे अखिलेश यादव का रुख विपक्षी एकता की राजनीति की ओर इशारा करता दिख रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी से मुलाकात के दौरान उन्होंने भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को कठिन समय में एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। अखिलेश ने बंगाल चुनाव में धांधली और दबाव में मतदान कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।
एक दिन पहले ही कोलकाता में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से अखिलेश यादव ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अभिषेक को गले लगा कर कहा कि आप लोग बहुत जोरदार तरीके से लड़े। साथ ही उन्होंने ममता से कहा, "आप हारी नहीं हैं दीदी।"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह सक्रियता सिर्फ समर्थन जताने तक सीमित नहीं है, बल्कि 2029 की राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखकर विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनाने की कोशिश भी हो सकती है।
बंगाल में ममता, तमिलनाडु में स्टालिन और उत्तर प्रदेश में अखिलेश- ये तीनों नेता भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े चेहरे माने जाते हैं। ऐसे में इनकी नजदीकियां आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर नए गठबंधन की भूमिका तैयार कर सकती हैं।