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Green Firecrackers: दिवाली पर दिल्ली-NCR में इस बार फूटेंगे 'ग्रीन पटाखे', जानिए क्या होते हैं ये और कैसे होगी इनकी पहचान?

Green Firecrackers In Delhi: ग्रीन पटाखे वैकल्पिक और स्वच्छ कच्चे माल का उपयोग करके बनाए जाते हैं। इनमें पारंपरिक पटाखों की तुलना में पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर और एल्युमीनियम की मात्रा कम होती है। यह आतिशबाजी का एक पर्यावरण अनुकूल ऑप्शन है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Oct 15, 2025 पर 1:42 PM
Green Firecrackers: दिवाली पर दिल्ली-NCR में इस बार फूटेंगे 'ग्रीन पटाखे', जानिए क्या होते हैं ये और कैसे होगी इनकी पहचान?
नॉर्मल पटाखों से विपरीत ग्रीन पटाखों को 30-40 प्रतिशत कम प्रदूषक उत्सर्जित करने के लिए डिजाइन किया गया है

Green Firecrackers: इस साल दिवाली पर दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवा थोड़ी बेहतर हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने NCR में ग्रीन पटाखों की अस्थायी बिक्री को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 18 से 21 अक्टूबर तक ही ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल शाम 6 बजे से 10 बजे के बीच किया जा सकेगा। लेकिन सवाल यह है कि ये ग्रीन पटाखे क्या हैं और आप मार्केट में असली ग्रीन पटाखे कैसे पहचानेंगे? आइए आपको बताते हैं।

क्या हैं ग्रीन पटाखे?

ग्रीन पटाखे आतिशबाजी का एक पर्यावरण अनुकूल ऑप्शन है। इन्हें दिवाली जैसे उत्सवों के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इनका निर्माण भारत में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (CSIR–NEERI) द्वारा 2018 में शुरू किया गया था और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 2019 में आधिकारिक तौर पर इन्हें लॉन्च किया गया।

नॉर्मल पटाखों से भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, और भारी धातुएं निकलती है। इसके विपरीत ग्रीन पटाखों को 30-40 प्रतिशत कम प्रदूषक उत्सर्जित करने के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही ये 125 डेसिबल की ध्वनि सीमा का भी पालन करते हैं।

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