Kanpur Suicide Case: 'मेरे पिता को मेरे शरीर को छूने न दें...' कानपुर के वकील ने सुसाइड नोट में बयां किया बचपन का दर्द

Kanpur Suicide Case: कानपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां पर एक 23 साल के युवा वकील ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड करने से पहले अपने पीछे दो पन्नों का एक नोट छोड़ा है, जिसमें उसने बचपन से अपने पिता की तरफ से मिले मानसिक उत्पीड़न के बारे में बताया है।

अपडेटेड Apr 25, 2026 पर 8:45 AM
Story continues below Advertisement
'मेरे पिता को मेरे शरीर को छूने न दें...' कानपुर के वकील ने सुसाइड नोट में बयां किया बचपन का दर्द

Kanpur Suicide Case: कानपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां पर एक 23 साल के युवा वकील ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड करने से पहले अपने पीछे दो पन्नों का एक नोट छोड़ा है, जिसमें उसने बचपन से अपने पिता की तरफ से मिले मानसिक और शारीरिक दबाव के बारे में विस्तार से लिखा है। बता दें कि मृतक का नाम प्रियांशु था, जो अपने पिता के साथ कानपुर कोर्ट में वकालत करता था। खबरों के मुताबिक, उसने उसी कोर्ट की बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी।

उसने नोट में लिखा कि छोटी-छोटी बातों पर उसे अक्सर धमकाया जाता था। उसने नोट में कहा, “मुझे मामूली बातों पर घर और नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी।” उसने यह भी बताया कि उसे पड़ोसियों के सामने अपमानित किया जाता था, जिससे वह अंदर से टूटता जा रहा था।

मेरे नोट को पूरा पढ़ा जाए


उसने अपने नोट में आगे लिखा कि उसकी आखिरी इच्छा है कि इसे पूरा पढ़ा जाए। इस नोट में उसने अपने बचपन की कई घटनाओं का जिक्र किया है। उसने बताया कि जब वह सिर्फ 6 साल का था, तब उसे बहुत कठोर सजा दी गई थी। उसने लिखा, “मैं सिर्फ छह साल का था जब मैंने बिना किसी से पूछे फ्रिज से आम का जूस निकाल लिया था। इसके लिए मुझे कपड़े उतारकर घर से बाहर निकाल दिया गया था। मैं समझता हूं कि माता-पिता को बच्चों के साथ सख्त होना चाहिए, लेकिन इतना भी नहीं कि उन्हें घुटन महसूस होने लगे। मैंने बहुत कोशिश की आगे बढ़ने और अपनी जिंदगी जीने की, लेकिन अब मुझे नहीं लगता कि यह सब करने का कोई मतलब है।”

'मैं हमेशा सजा के डर में जीता रहा'

उसने यह भी बताया कि उसे पढ़ाई से जुड़े कई फैसले जबरदस्ती लेने पड़े और वह हमेशा सजा के डर में जीता रहा। उसने लिखा कि उसे कक्षा 9 में कंप्यूटर साइंस चुनने के लिए मजबूर किया गया था और कक्षा 10 में भी उनके अंकों को लेकर उन्हें धमकी दी गई थी।

लगातार दबाव के प्रभाव का वर्णन करते हुए उसने लिखा, "मुझे नहीं लगता कि मैं अब और इस स्थिति में जी सकता हूं।"

'मेरे पिता को मेरे शरीर को छूने न दें'

सुसाइड नोट के आखिरी हिस्से में प्रियांशु ने माता-पिता से अपील करते हुए अपनी अंतिम इच्छाएं व्यक्त कीं। उसने दो पन्नों के सुसाइड नोट में लिखा, “मैं सभी माता-पिता से अपील करता हूं: अपने बच्चों पर उतना ही दबाव डालें, जितना वे सह सकें। मेरे पापा को मेरे शरीर को छूने न दें। मैं नहीं चाहता कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो ताकि मेरे परिवार पर कोई असर न पड़े। मेरी यही कामना है कि किसी को भी ऐसा पिता न मिले। मैं हार गया, पापा जीत गए। उन्हें बधाई।”

यह भी पढ़ें: दिल्ली मर्डर केस: आरोपी की पोटेंसी टेस्ट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, साइको एनालिसिस भी कराएगी पुलिस!

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।