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Two Rupee Doctor: डॉ रायरू गोपाल ने 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, सीएम ने जताया दुख

2 रुपये वाले डॉ गोपाल सुबह चार बजे से शाम के चार बज तक मरीजों का इलाज करते थे। उन्होंने अपने कॅरियर में लगभग 18 लाख मरीजों का इलाज किया और जिन मरीजों के पास दवा खरीदने के पैसे नहीं होते थे उन्हें मुफ्त दवा भी देते थे। उनके निधन पर केरल के सीएम विजयन ने शोक जताया है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 04, 2025 पर 10:40 AM
Two Rupee Doctor: डॉ रायरू गोपाल ने 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, सीएम ने जताया दुख

केरल के कन्नूर निवासी डॉ रायरू गोपाल का 80 साल की उम्र में वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह अपने निवास ‘लक्ष्मी’ में गरीब का इलाज 2 रुपये में करते थे। हालांकि अधिक उम्र हो जाने की वजह से उन्होंने 2024 में अपनी क्लीनिक बंद कर दिया था। उनके परिवार ने निधन की जानकारी दी। उनके परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बेटी हैं।

डॉ एके रायरू गोपाल पिछले पांच दशक से अपनी क्लीनिक में गरीब मरीजों का इलाज मात्र 2 रुपये फीस लेकर करते थे। यही वजह है कि लोग उन्हें ‘2 रुपये वाले डॉक्टर’ और ‘जनता का डॉक्टर’ कहते थे। उनकी क्लीनिक उनके घर पर थी, जहां वह सुबह चार बजे से शाम चार बजे तक लोगों का इलाज करते थे। जिन मरीजों के पास दवाओं के लिए पैसे नहीं होते थे, वह उन्हें मुफ्त में दवाइयां भी देते थे।

एनएनआई के मुताबिक डॉ गोपाल ने अपने कॅरियर में तकरीबन 18 लाख मरीजों का इलाज किया। बाद में गिरती सेहत के कारण उन्होंने अपनी क्लीनिक का समय घटाकर सुबह 6 बजे से शाम के 4 बजे तक कर दिया था। अपने प्रैक्टिस के चरम पर, वह रोजाना 300 से अधिक मरीजों का इलाज करते थे।

डॉ गोपाल ने शनिवार को अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन पर केरल के मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन ने दुख जताया है। अपने शोक संदेश में सीएम विजयन ने कहा, ‘आधी सदी से वह अपनी चिकित्सा सेवा के लिए केवल दो रुपये ही लेते थे। लोगों की सेवा करने की उनकी इच्छा गरीब मरीजों के लिए एक बड़ी राहत थी।’

डॉ. रायरू गोपाल मश्हूर चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. ए.जी. नांबियार और ए.के. लक्ष्मीकुट्ट्यम्मा के पुत्र थे और हमेशा अपने पिता के सिद्धांतों पर अडिग रहे। उन्होंने अपना जीवन अपने पिता के उसूलों पर जिया, जिन्होंने एक बार कहा था, ‘अगर तुम्हें पैसा कमाना है, तो कुदाल उठाकर बैंक में सेंध लगानी चाहिए, न कि चिकित्सा जैसे महान पेशे का दुरुपयोग करना चाहिए।’ डॉ गोपाल का दिन सुबह 2.15 बजे गौशाला की साफ-सफाई के साथ शुरू होता था। उसके बाद सुबह 5.30 बजे स्नान, प्रार्थना और अखबार पढ़ते थे। इसके बाद सुबह 6 बजे से मरीजों का आना शुरू हो जाता था।

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