भारत ने पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश पर तंज कसा और इस पर कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली में हुई ऑल पार्टी मीटिंग में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को “दलाल देश” तक कह दिया, ऐसा सूत्रों ने बताया। बैठक में मौजूद एक सदस्य के मुताबिक, उन्होंने कहा, “भारत पाकिस्तान की तरह बीच में दलाली करने वाला देश नहीं बनेगा।” पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है।
इस बीच अटकलें और तेज हो गईं, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने समाधान में मदद करने की इच्छा जताई थी।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान 1981 से इस तरह की भूमिका निभाता रहा है। उस समय से वह अमेरिका में अपने दूतावास के जरिए दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद करता रहा है।
NDTV को सूत्रों ने बताया कि ऐसे कदम अमेरिका और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों (bilateral relations) से जुड़े होते हैं। साथ ही, सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट को संभालने के अपने तरीके का बचाव किया और “कुछ नहीं करने” या “नीति साफ न होने” जैसे आरोपों को खारिज किया।
बैठक में यह भी बताया गया कि अब तक 4,25,000 भारतीयों को ईरान से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
सरकार ने यह भी कहा कि ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंध पिछले 15 साल से ज्यादा समय से लगे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान से तेल खरीदना जारी रखा।
इसके अलावा यह भी बताया गया कि भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा रूस से मंगाता है। इससे साफ होता है कि भारत ऊर्जा के लिए अलग-अलग स्रोतों पर भरोसा करता है और संतुलित रणनीति अपनाता है।
बाद में किरेन रिजिजू ने कहा कि ऑल पार्टी मीटिंग में उठाए गए सभी सवालों के जवाब सरकार ने दे दिए हैं और सभी दलों ने एकजुट रहने की बात कही है।