Swami Chaitanyananda Saraswati: दिल्ली के एक आश्रम में 17 स्टूडेंट्स के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार बाबा चैतन्यानंद सरस्वती की पोल दिल्ली पुलिस ने खोल दी है। पुलिस की जांच में न केवल उसके आपराधिक चरित्र का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि पता चला है कि यह 'बाबा' फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और उच्च पदों से संबंध होने का झूठा दावा करने में भी लिप्त था। पुलिस ने चैतन्यानंद को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई ठिकानों पर तलाशने के बाद आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। आइए आपको बताते हैं जांच में क्या आया सामने।
दो फर्जी पासपोर्ट और नकली पहचान
पुलिस को जांच के दौरान चैतन्यानंद के पास से दो पासपोर्ट मिले, जो कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके हासिल किए गए थे। पहला पासपोर्ट 'स्वामी पार्थ सारथी' के नाम पर था, जिसमें उनके पिता का नाम स्वामी घनानंद पुरी (जो उनके पैन कार्ड से भी मेल खाता है) और माता का नाम शारदा अम्बा दर्ज था। जन्मस्थान दार्जिलिंग बताया गया था। वहीं दूसरा पासपोर्ट 'स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती' के नाम पर था, जिसमें पिता का नाम स्वामी दयानंद सरस्वती और माता का नाम शारदा अम्बल लिखा था। इसमें जन्मस्थान तमिलनाडु दर्ज था। यह दिखाता है कि यह 'बाबा' कितनी आसानी से अपनी पहचान बदलता रहता था।
UN और BRICS का 'फर्जी राजदूत'
जांचकर्ताओं को बाबा के पास से दो फर्जी विजिटिंग कार्ड भी मिले है। एक कार्ड में उसने खुद को संयुक्त राष्ट्र (UN) का स्थायी राजदूत बताया है, और दूसरे में BRICS का भारतीय विशेष दूत होने का दावा किया है। इसके अलावा, पुलिस ने एक आईफोन सहित उसके तीन फोन भी बरामद किए है। उसके दो अलग-अलग नाम से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में बैंक खाते भी मिले हैं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि चैतन्यानंद अपनी छवि और प्रभाव को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से अपने संबंधों का झूठा दावा करता था। वह अपने सहयोगियों को लोगों को फोन करने और PMO लिंक पर जोर देने का निर्देश देता था। दक्षिण-पश्चिम के DCP अमित गोयल ने बताया कि इस फर्जीवाड़े के सहारे वह अपना रुतबा दिखाता था।
आश्रम से गबन किए 40 करोड़ रुपये
अधिकारियों ने बताया कि 1998 में दिल्ली के उपराज्यपाल ने शारदा पीठ को वसंत कुंज में एक 'मठ' बनाने के लिए भूखंड आवंटित किया था, और चैतन्यानंद को वरिष्ठ अधिकारी बनाया गया था। आरोप है कि 2008 में बाबा ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर बिना अनुमति के इसका नाम बदलकर 'श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट' कर दिया और मठ की संपत्ति को भी किराए पर दे दिया। अधिकारियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके करीब 40 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था।
पहले भी दर्ज हो चुके है मामले पर बचने में रहा कामयाब
पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि चैतन्यानंद पहले भी दो बार 2009 और 2016 में छेड़छाड़ के आरोपों से बचने में सफल रहा था। उस समय उसने कथित तौर पर अपने नेटवर्क और प्रभाव का इस्तेमाल कर अभियोजन से छुटकारा पा लिया था। 2016 में शिकायत दर्ज कराने वाली 20 वर्षीय एक महिला ने बताया था कि बाबा की नजर उस पर थीं और वह उसे 'बेबी' और 'स्वीट गर्ल' कहकर अश्लील मैसेज भेजता था। वह केवल आठ महीने में संस्थान छोड़कर चली गई थी।
अगस्त की शुरुआत में 17 महिलाओं द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद चैतन्यानंद फरार हो गया था। माना जा रहा था कि वह लंदन भाग गया होगा, लेकिन पुलिस ने उसे उत्तराखंड, मथुरा और वृंदावन में धार्मिक प्रतिष्ठानों में छिपते हुए ट्रैक किया। वह लगातार 15 से अधिक होटलों में ठिकाना बदल रहा था। आखिरकार दिल्ली पुलिस ने उसे तड़के 3:30 बजे ताज गंज के होटल फर्स्ट आगरा से गिरफ्तार कर लिया और दिल्ली के वसंत कुंज पुलिस स्टेशन लाया गया।