Nashik Case: महाराष्ट्र के नासिक में वर्कप्लेस हैरेसमेंट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि नासिक की एक मल्टीनेशनल कंपनी की महिला कर्मचारियों की मेंटल और सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायतों के बाद छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने मल्टीनेशनल कंपनी का नाम लिए बिना कहा कि इस संबंध में कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि एक दिन पहले गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को बुधवार (8 अप्रैल) को एक लोकल कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 10 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि एक आरोपी पहले से ही ज्यूडिशियल कस्टडी में है। उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच के लिए पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक के निर्देश पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है।
यह मामला खुद को धार्मिक नेता बताने वाले अशोक खराट की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है, जिन्हें सालों तक महाराष्ट्र के बड़े नेताओं का संरक्षण मिला हुआ था। इस बीच, पुलिस कमिश्नर ने हैरेसमेंट या सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायत वाली किसी भी महिला से उनसे संपर्क करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिकायत करने वाली और संगठन की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
9 पीड़ितों की शिकायत पर FIR दर्ज
मामले में कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें 9 पीड़ित शामिल हैं। इनमें आठ महिलाएं और एक पुरुष है। छह पुरुष आरोपियों की पहचान आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसिफ अत्तर के रूप में हुई है। जबकि सातवीं आरोपी एक महिला है जो पुणे में कंपनी की HR रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर काम करती थी।
पुलिस के अनुसार, ये घटनाएं कथित तौर पर दो से तीन साल के दौरान हुई। पीड़ितों में ज्यादातर 18 से 25 साल की लड़कियां शामिल हैं। उनका का कहना है कि उनके साथ गलत तरीके से छेड़छाड़ की गई। उनके शरीर और कपड़ों पर गलत कमेंट किए गए। इतना ही नहीं उनके धर्म को टारगेट करते हुए बार-बार गंदी बातें की गईं। रेप केस का एक आरोपी शादीशुदा है। उस पर आरोप है कि उसने हमले से पहले पीड़ित को झूठे बहाने से रिलेशनशिप में फंसाया।
बीफ खाने के लिए किया गया मजबूर
पुलिस सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि पीड़ितों को बार-बार उनके धर्म को टारगेट करते हुए नाम लेकर बुलाया गया। 9 में से अकेले पुरुष पीड़ित को धार्मिक गालियां देकर धमकाया गया। कथित तौर पर उसे बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया। बताया जा रहा है कि एक महिला पीड़ित जो पहले काम पर जींस और वेस्टर्न कपड़े पहनती थी, वह धीरे-धीरे इंडियन कपड़े पहनने लगी।
बाद में वह दुपट्टे से अपना चेहरा ढकने लगी। उसने रोजा भी रखना शुरू कर दिया। उसके परिवार ने बदलाव देखे लेकिन शुरू में कोई शोर नहीं मचाया। जब उसने रोजा रखना शुरू किया, तभी उन्हें एहसास हुआ कि कुछ गलत हो गया है। बाद में परिवार ने शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ितों ने पहले POSH एक्ट (वर्कप्लेस पर महिलाओं का सेक्सुअल हैरेसमेंट (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) एक्ट, 2013) के तहत फॉर्मल शिकायतें दर्ज कराई थीं। लेकिन उनका आरोप है कि आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने तब से HR अधिकारी को भी उन शिकायतों को कथित तौर पर दबाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
मामले के बड़े पैमाने को देखते हुए जांच का नेतृत्व करने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई है। पुलिस ने संकेत दिया है कि अधिकारी सभी एंगल से जांच कर रहे हैं। उनका मानना है कि और पीड़ित अभी तक सामने नहीं आए होंगे। अधिकारियों ने किसी से भी संबंधित जानकारी रखने वाले SIT से संपर्क करने की अपील की है।