न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री (MNRE) ने बुधवार को कहा कि भारत की सोलर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 100 गीगावाट (GW) के लेवल पर पहुंच गई है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह विकास आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मील का पत्थर है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, "यह भारत की मैन्यूफैक्चरिंग क्षमताओं की सफलता और क्लीन एनर्जी को लोकप्रिय बनाने की दिशा में हमारे प्रयासों का नतीजा है।"
केंद्रीय न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि सौर मॉड्यूल का उत्पादन काफी तेज़ी से हुआ है। जोशी ने इसे 2014 के मात्र 2.3 गीगावाट की क्षमता से हुई "शानदार बढ़त" बताया है। उन्होंने कहा, "उच्च दक्षता वाले सौर मॉड्यूल के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसी क्रांतिकारी पहलों के साथ, हम एक मज़बूत और आत्मनिर्भर सोलर मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम का विकास कर रहे हैं। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और 2030 तक 500 गीगावाट नॉन- फॉसिल क्षमता के लक्ष्य की ओर हमारे कदम को और मज़बूत करती है।"
अब तक बनाए गए 100 गीगावाट क्षमता वाले सोलर मॉड्यूल पूरी तरह से सरकार के अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्यूफैक्चरर्स की (ALMM) के तहत बने हैं। ALMM, MNRE द्वारा बनाई जाने वाली एक ऐसी लिस्ट है,जिसमें ये बताया जाता है कि कौन से सोलर पीवी मॉड्यूल और उनको बनाने वाली कंपनियां सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त सोलर प्रोजेक्ट्स में भाग ले सकेंगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल क्वालिटी मॉड्यूल्स का ही इस्तेमाल हो जिससे सोलर एनर्जी सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा हो और लोगों का इस पर भरोसा बढ़े।
सोलर पीवी मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 4सालों में 12 गुना बढ़ी
केंद्रीय न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री ने ALMM से जुड़ा आदेश 2 जनवरी, 2019 को जारी किया था। सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए पहली ALMM लिस्ट 10 मार्च, 2021 को जारी की गई थी। इसकी शुरुआती लिस्टिंग में लगभग 8.2 गीगावाट क्षमता शामिल थी। चार सालों में,यह क्षमता बारह गुना से भी ज्यादा बढ़कर 100 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है।