India-Bangladesh Row: पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार (23 दिसंबर) को कोलकाता में बांग्लादेश के राजदूत से मुलाकात करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उन्हें मिलने से मना किया गया तो वह कोलकाता में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन को काम नहीं करने देंगे। अधिकारी ने कहा कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कोलकाता में पड़ोसी देश के डिप्टी हाई कमीशन से मुलाकात का समय मांगा है।
उन्होंने कहा, "मैं बैठक में अकेला जाऊंगा। लेकिन अगर मुलाकात का समय नहीं दिया गया, तो हम 26 दिसंबर से बड़े पैमाने पर एकत्र होना सुनिश्चित करेंगे। हम भारत में डिप्टी हाई कमीशन को सुचारू रूप से काम नहीं करने देंगे।"
अधिकारी ने यह बयान 'हिंदू हुंकार पदयात्रा' नामक मार्च का नेतृत्व करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिया। इस मार्च को पार्क सर्कस में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन जाने के दौरान पुलिस ने बीच में ही रोक दिया था। इसके कारण झड़प हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया, "आज कोलकाता में जो हुआ वह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बांग्लादेश के (अंतरिम सरकार के प्रमुख) मोहम्मद यूनुस के बीच कोई अंतर नहीं है।" BJP नेता ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। एक घायल महिला को इमरजेंसी में इलाज के लिए ले जाना पड़ा।
अधिकारी ने दावा किया, "बर्बर पुलिस हमले में संतों सहित निहत्थे प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया।" पुलिस ने कहा कि डिप्टी हाई कमीशन के पास प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड तोड़ने से रोकने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बल प्रयोग किया गया था।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर कथित हमले के विरोध में एक हिंदूवादी संगठन के सैकड़ों समर्थकों ने मंगलवार दोपहर को कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप उच्चायोग की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका तो उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई।
कोलकाता के बेकबागन में स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय के करीब पहुंचने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। पुलिस के मुताबिक, कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। झड़प में कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई।
बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कपड़े की एक फैक्टरी में काम करने वाले 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को मैमनसिंह के बालुका में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। फिर उसके शव को सरेआम आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने दास की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की।