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India-Pakistan Ceasefire: 'कोई भूमिका नहीं थी'; भारत ने चीन के पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता के दावे को किया खारिज

India-Pakistan Ceasefire: चीनी विदेश मंत्री ने दावा किया है कि भारत-पाकिस्तान तनाव समेत अन्य प्रमुख मुद्दों पर चीन ने मध्यस्थता की। लेकिन नई दिल्ली ने कहा है कि 7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ विवाद दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत से सुलझाया गया था

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Dec 31, 2025 पर 2:09 PM
India-Pakistan Ceasefire: 'कोई भूमिका नहीं थी'; भारत ने चीन के पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता के दावे को किया खारिज
India-Pakistan Ceasefire: सरकारी सूत्रों ने भारत-पाकिस्तान सीजफ़ायर पर चीन के मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया है

India-Pakistan Ceasefire:  नई दिल्ली ने चीन के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि उसने इस साल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान कोई मध्यस्थता वाली भूमिका निभाई थीभारत ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद हुए सीजफायर समझौते में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं थाCNN-News18 ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि नई दिल्ली ने चीन के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दी है कि उसने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की थीभारत ने इस बात पर जोर दिया कि दुश्मनी खत्म करने में किसी बाहरी देश की कोई भूमिका नहीं थी

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया था कि इस साल चीन द्वारा मध्यस्थता किए गए प्रमुख संवेदनशील मुद्दों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल रहे। हालांकि, नई दिल्ली का यह कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 7 से 10 मई के दौरान संघर्ष का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था।

भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है। भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था।

बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर एक सिम्पोजियम में वांग ने कहा, "इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है।"

उन्होंने कहा, "स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।" उन्होंने कहा, "गतिरोध वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हमने उत्तरी म्यांमा, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फलस्तीन और इजराइल के मुद्दों तथा कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।"

इस साल 7 से 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में चीन की भूमिका, विशेष रूप से उसके द्वारा पाकिस्तान को प्रदान की गई सैन्य सहायता, गंभीर जांच और आलोचना के दायरे में आ गई। कूटनीतिक मोर्चे पर चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने की अपील की थी।

भारत सरकार के एक सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया, "हमने पहले ही ऐसे दावों को खारिज कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। हमारा रुख पहले भी कई बार साफ किया जा चुका है कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर दोनों देशों के DGMOs के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था।"

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