भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर अगले दौर की बातचीत के लिए अमेरिकी अधिकारियों की एक टीम आने वाले हफ्तों में भारत आ सकती है। यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका 9 जुलाई से पहले अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमत हो सकते हैं। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। अभी तक हुई बातचीत में भारत ने यहां से अमेरिका जाने वाले सामान पर अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए 26 प्रतिशत के रेसिप्रोकल टैरिफ से पूरी छूट दिए जाने पर जोर दिया है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों में से एक ने कहा, ‘‘ट्रेड डील पर बातचीत के लिए अमेरिकी दल के भारत आने की उम्मीद है। बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है।’’ भारत की ओर से चीफ निगोशिएटर और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह वाशिंगटन की 4 दिवसीय यात्रा पूरी की। इस दौरान उन्होंने प्रस्तावित समझौते पर अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ बातचीत की।
पिछले सप्ताह पीयूष गोयल भी थे अमेरिका में
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी ट्रेड डील पर बातचीत को गति देने के लिए पिछले सप्ताह वाशिंगटन में थे। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से दो बार मुलाकात की। अमेरिका ने इस साल 2 अप्रैल को भारतीय सामान पर 26 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किया था, जो कि पहले से लागू टैरिफ के अलावा है। हालांकि बाद में 9 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ में 90 दिन की राहत दी और वह यह कि इन 90 दिनों के दौरान देशों को केवल 10 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।
भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को इस वर्ष के अंत (सितंबर-अक्टूबर) तक पूरा करने की समय सीमा तय की है। सूत्रों के अनुसार, हो सकता है कि दोनों पक्ष इससे पहले ही अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमत हो जाएं।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड की स्थिति
अमेरिका लगातार चौथे वर्ष यानि कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना रहा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा। भारतीय सामान के कुल निर्यात में से 18 प्रतिशत अमेरिका जाता है। वहीं भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 6.22 प्रतिशत है।
वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका के साथ भारत का सामान के मामले में ट्रेड सरप्लस 41.18 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह 2023-24 में 35.32 अरब डॉलर, 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब डॉलर और 2020-21 में 22.73 अरब डॉलर था। जब किसी देश का आयात, उसके निर्यात से ज्यादा होता है तो व्यापार घाटे की स्थिति बनती है। वहीं निर्यात, आयात से अधिक होने पर ट्रेड सरप्लस की स्थिति बनती है।