India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते ने वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति को मजबूत कर दिया है। जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता भारत को उसके एशियाई प्रतिद्वंद्वियों वियतनाम, थाईलैंड और अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले एक बड़ी बढ़त दिलाने वाला है। जहां कई एशियाई देश अभी भी अमेरिका के कड़े टैरिफ का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत को मिली रियायतों से भारतीय सामान अमेरिकी बाजारों में सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में डॉलर की आवक भी तेज होगी, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी।
'रुसी तेल' न खरीदने की शर्त के साथ हुई टैरिफ में कटौती
इस डील की बारीकियों को देखें तो सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अमेरिका द्वारा लगाया गया 25% का दंडात्मक शुल्क वापस लेना है। अब भारतीय सामानों पर केवल 18% का पारस्परिक टैरिफ लागू होगा। हालांकि, इस बड़ी राहत के साथ एक कूटनीतिक शर्त भी जुड़ी है। अमेरिका के कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत ने रूसी तेल के आयात को धीरे-धीरे बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह कदम न केवल व्यापारिक है, बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भारत को वाशिंगटन के और करीब ले आता है।
हीरा, कपड़ा और ऑटोमोबाइल सहित इन सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत
ट्रेड डील का सबसे पॉजिटिव असर भारत के एक्सपोर्ट से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ेगा। जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक, हीरा और आभूषण, कपड़ा, मशीनरी, रसायन और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह डील किसी वरदान से कम नहीं है। इन क्षेत्रों में टैरिफ घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें पहले भी कई छूट मिलती रही हैं। शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो यह खबर निवेशकों के लिए एक 'बूस्टर' की तरह है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुझान भारत की तरफ और बढ़ सकता है।
डिजिटल ट्रेड और वैश्विक प्रोड्यूसर बनने पर है भारत की नजर
6 फरवरी 2026 को घोषित यह फ्रेमवर्क दरअसल भारत-अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की पहली सीढ़ी है। आने वाले समय में दोनों देश गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने, डिजिटल व्यापार के नियम बनाने और सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने पर काम करेंगे। अगर यह अंतरिम समझौता सफल रहता है, तो भविष्य में कई और उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म किए जा सकते है। कुल मिलाकर, यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने और वैश्विक पटल पर एक 'हाई-क्वालिटी प्रोड्यूसर' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।