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India-US Trade Deal: ट्रेड डील से एशियाई देशों पर भारत की बढ़त, एक्सपोर्ट में बंपर उछाल से डॉलर की होगी बारिश

India-US Trade Deal: ट्रेड डील का सबसे पॉजिटिव असर भारत के एक्सपोर्ट से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ेगा। जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट के मुताबिक, हीरा और आभूषण, कपड़ा, मशीनरी, रसायन और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह डील किसी वरदान से कम नहीं है। इन क्षेत्रों में टैरिफ घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी

Abhishek Guptaअपडेटेड Feb 09, 2026 पर 12:39 PM
India-US Trade Deal: ट्रेड डील से एशियाई देशों पर भारत की बढ़त, एक्सपोर्ट में बंपर उछाल से डॉलर की होगी बारिश
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में डॉलर की आवक भी तेज होगी, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते ने वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति को मजबूत कर दिया है। जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता भारत को उसके एशियाई प्रतिद्वंद्वियों वियतनाम, थाईलैंड और अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले एक बड़ी बढ़त दिलाने वाला है। जहां कई एशियाई देश अभी भी अमेरिका के कड़े टैरिफ का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत को मिली रियायतों से भारतीय सामान अमेरिकी बाजारों में सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में डॉलर की आवक भी तेज होगी, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी।

'रुसी तेल' न खरीदने की शर्त के साथ हुई टैरिफ में कटौती

इस डील की बारीकियों को देखें तो सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अमेरिका द्वारा लगाया गया 25% का दंडात्मक शुल्क वापस लेना है। अब भारतीय सामानों पर केवल 18% का पारस्परिक टैरिफ लागू होगा। हालांकि, इस बड़ी राहत के साथ एक कूटनीतिक शर्त भी जुड़ी है। अमेरिका के कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत ने रूसी तेल के आयात को धीरे-धीरे बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह कदम न केवल व्यापारिक है, बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भारत को वाशिंगटन के और करीब ले आता है।

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