इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) ने लगभग 8 सालों में पहली बार ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) खरीदी है। भारत, मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण LPG की बढ़ती कमी को रोकने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया है कि इंडियन ऑयल इस खेप को अपनी सरकारी साथी कंपनियों- भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ शेयर करेगी।
डेटा इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, इंडियन ऑयल ने आखिरी बार जून 2018 में ईरान से LPG खरीदी थी। फर्म ने बताया कि मौजूदा खेप में लगभग 43,000 टन ब्यूटेन और प्रोपेन शामिल है। यह मात्रा भारत में आधे दिन की मांग को पूरा करने के लिए ही काफी होगी।
इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने दी एक अस्थायी छूट
ईरान से ऊर्जा की यह भारत की पहली खरीद है, जो इस महीने की शुरुआत में अमेरिका द्वारा दी गई एक अस्थायी छूट के बाद संभव हुई है। इस छूट के तहत भारत को ईरान से कच्चा तेल या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति दी गई थी। बाजार उन संभावित खरीदारों की तलाश में था, जो ईरान की खेपों को खरीदने में रुचि दिखाएं। ये खेप लंबे समय से अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के कारण पहुंच से बाहर मानी जा रही थीं।
Kpler के शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि LPG वाहक जहाज 'सी बर्ड' (Sea Bird) ईरान की LPG ले जा रहा है। संकेत है कि वह गुरुवार को भारत के मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचेगा। इस जहाज ने 17 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय पहले चीन की ओर जाने का संकेत दिया था, जिसके बाद उसने अपने ट्रांसपोंडर सिग्नल बंद कर दिए थे। कुछ दिनों बाद यह जहाज अरब सागर में फिर से दिखाई दिया और पूर्व की ओर बढ़ रहा था, जबकि इसका गंतव्य विपरीत दिशा में स्थित दुबई था।
कुल LPG जरूरत का दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है भारत
देश में LPG का इस्तेमाल आमतौर पर खाना पकाने के ईंधन के रूप में किया जाता है। भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है। इसमें से 90% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, वह भी मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के रास्ते। इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग के चलते ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को कंट्रोल कर व्यावसायिक जहाजों का यातायात रुकवा दिया। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत समेत उसके 'फ्रेंडली देशों' के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यह राहत पूरी तरह मुफ्त नहीं होगी। ईरान ने साफ कर दिया है कि रास्ता तभी मिलेगा, जब जहाज उनकी शर्तों को मानेंगे। केवल उन्हीं जहाजों को जाने दिया जाएगा, जो ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाई में शामिल नहीं हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हवाले से मुंबई स्थित ईरानी दूतावास ने जानकारी दी है कि कुछ खास देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। इस लिस्ट में भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारत के 24 जहाज होर्मुज में फंसे थे जिनमें से 4 जहाजों को निकाला जा चुका है। भारत होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दो और LPG खेपों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए चल रही बातचीत के अंतिम चरण में भी है। 'ग्रीन आशा' और 'ग्रीन सांवी' जहाजों को BPCL ने कॉन्ट्रैक्ट पर लिया है।