Pahalgam Attack Anniversary: "शुरू में लगा सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ है..." टूरिस्ट गाइड ने बताया कि कैसे बचाई 11 पर्यटकों की जान

Pahalgam Attack Anniversary: 22 अप्रैल 2025 का वह काला दिन, जिस दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने गए पर्यटकों पर आतंकियों ने अचानक से हमला कर दिया। आज भी लोगों के दिलों में डर पैदा कर देता है। उस दिन आतंकियों ने पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई।

अपडेटेड Apr 22, 2026 पर 11:20 AM
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पहलगाम हमला: गोलियों के बीच ‘हीरो’ बना गाइड, 11 पर्यटकों की बचाई जान

Pahalgam Attack Anniversary: 22 अप्रैल 2025 का वह काला दिन, जिस दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने गए पर्यटकों पर आतंकियों ने अचानक से हमला कर दिया। आज भी लोगों के दिलों में डर पैदा कर देता है। उस दिन आतंकियों ने पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई, जिसमें 6 बेगुनाह लोगों की जान चली गई। “मिनी स्विट्जरलैंड” कहे जाना वाला बैसरन घाटी उस दिन खून से सराबोर हो गया। लोग गोलियों की आवाज सूनते ही दहशत में आ गए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन खुले मैदान में उनके लिए छिपने की कोई जगह नहीं थी। इस अफरा-तफरी के बीच एक हीरो सामने आया: नजाकत अली, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर छत्तीसगढ़ के 11 पर्यटकों की जान बचाई।

पर्यटकों का यह ग्रुप छत्तीसगढ़ में अपने घर से दूर पहाड़ों की सैर के लिए आया था। उनके साथ उनका लोकल गाइड नजाकत अली भी था, जो कश्मीर का रहने वाला 30 वर्षीय पर्यटक गाइड और शॉल व्यापारी है। 22 अप्रैल को नजाकत पर्यटकों को बैसरन घाटी ले गया था, जहां वह जिप लाइन एग्जिट पॉइंट के पास कुछ बच्चों के साथ इंस्टाग्राम रील बना रहा था। फिर अचानक, आतंक ने शांति भंग कर दी।

पर्यटक गाइड नजाकत ने बताई पहलगाम हमले की कहानी 


नजाकत मीडिया को बताया कि उसने गोलियों की आवाज सुनी, लेकिन शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सेना और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ है। लेकिन अचानक, एक आतंकवादी ने पर्यटकों पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया।

पर्यटकों को जमीन में लेटने को कहा

नजाकत के अनुसार, उन्होंने अपने साथ मौजूद 11 पर्यटकों को जमीन पर लेट जाने को कहा। कुछ ही मिनटों में, उन्होंने घाटी के हर छिपे हुए रास्ते की जानकारी के आधार पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वह पर्यटकों को घने जंगल से होते हुए लगभग सात किलोमीटर तक ले गए, जब तक कि वे पहलगाम नहीं पहुंच गए।

वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि दो महिलाएं जंगल में छूट गई हैं। नजाकत ने साहस दिखाते हुए वापस उस खतरनाक इलाके में जाकर उन महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

नजाकत ने बताया कि इस हमले में उसके मामा के बेटे, सैयद आदिल शाह की मौत हो गई थी।

कैबिनेट मंत्री ने किया सम्मानित

कल छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक कैबिनेट मंत्री ने नजाकत को सम्मानित किया, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद थे। तस्वीरों में नजाकत को कुछ मंत्रियों से फूल और पदक लेते हुए दिखाया गया है।

नजाकत ने मीडिया को बताया कि एक साल बाद, बड़ी संख्या में पर्यटक कश्मीर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "सिर्फ एक नहीं, बल्कि सैकड़ों नजाकत उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।"

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