झारखंड के हजारीबाग की मिट्टी में कुछ तो खास है। यहां की हवा में इतिहास की गंध घुली है और हर कण में बीते युगों की कहानी छिपी है। कहते हैं- समय बीत जाता है, लेकिन मिट्टी अपने अंदर सब कुछ सहेज कर रखती है। कुछ ही दिन पहले, हजारीबाग के शांत से गांव गोदखर में सुबह की शुरुआत आम दिनों जैसी थी। लोधा परिवार की धनवा देवी अपने नए घर की नींव खुदवाने में व्यस्त थीं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें यह घर मिल रहा था। लेकिन इस बार धरती के भीतर से सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, इतिहास खुद बाहर आ गया।
