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Delimitation Row: '850 सीटों वाली लोकसभा लोकतंत्र के लिए खतरनाक...'; शशि थरूर ने परिसीमन प्रस्ताव पर जताई चिंता

Delimitation exercise: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आगामी परिसीमन प्रक्रिया के तहत लोकसभा को लगभग 824-850 सीटों तक बढ़ाने के केंद्र के कथित प्रस्ताव की आलोचना की है। उनका तर्क है कि बहुत बड़ी संसद विधायी जांच को कमजोर करेगी। सांसदों को हाशिए पर धकेल देगी और सत्ता का संतुलन कार्यपालिका की ओर झुका देगी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jul 30, 2026 पर 12:32 PM
Delimitation Row: '850 सीटों वाली लोकसभा लोकतंत्र के लिए खतरनाक...'; शशि थरूर ने परिसीमन प्रस्ताव पर जताई चिंता
Delimitation exercise: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आगामी परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं

Delimitation exercise: तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आगामी परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 824 से 850 किए जाने की कथित योजना पर गंभीर चिंता जताई है। थरूर का कहना है कि इतनी बड़ी लोकसभा न केवल संसदीय व्यवस्था को कमजोर करेगी। बल्कि सांसदों की भूमिका भी सीमित हो जाएगी। साथ ही कार्यपालिका (Executive) का प्रभाव पहले से अधिक बढ़ जाएगा।

'द इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे अपने एक आर्टिकल में थरूर ने कहा कि केंद्र सरकार यह तर्क दे रही है कि देश की बढ़ती आबादी के अनुरूप लोकसभा का आकार बढ़ाया जाना चाहिए। लेकिन यह केवल जनसंख्या का सवाल नहीं है। बल्कि संसद के प्रभावी संचालन और लोकतांत्रिक जवाबदेही का भी मुद्दा है। उन्होंने लिखा, "लोकसभा को 850 सीटों तक ले जाने का फैसला भारत को एक असामान्य और लोकतंत्र के लिए खतरनाक दिशा में ले जाएगा।"

दक्षिणी राज्यों के साथ हो सकता है अन्याय

शशि थरूर ने परिसीमन के राजनीतिक और संघीय (Federal) प्रभावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने वर्षों से जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है। उन्हें इस प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, अधिक जनसंख्या वाले उत्तरी राज्यों को सीटों में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक, यह व्यवस्था उन राज्यों के साथ अन्याय होगी जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया।

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