दुबई में ICU में भर्ती मां, 1.25 करोड़ रुपए का बिल: US ईरान युद्ध के बीच एक भारतीय व्यक्ति ने लगाई मदद की गुहार

थिलक्कुमार की मां उनसे मिलने दुबई आई थीं, लेकिन अचानक उन्हें गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण हो गया। पिछले 40 दिनों से वह अस्पताल के ICU में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें कम से कम दो महीने और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ेगी

अपडेटेड Mar 14, 2026 पर 2:54 PM
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दुबई में ICU में भर्ती मां, 1.25 करोड़ रुपए का बिल: US ईरान युद्ध के बीच एक भारतीय व्यक्ति ने लगाई मदद की गुहार

दुबई को लंबे समय से विदेशी कामगारों और पर्यटकों के लिए सुरक्षित जगह माना जाता था, लेकिन अब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण हालात कुछ बदल गए हैं। ईरान की कार्रवाई, जो अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में शुरू हुई, उसके असर अब दुबई तक महसूस किए जा रहे हैं। ड्रोन हमलों और आसमान में धमाकों की आवाजों ने दुबई की सामान्य और व्यस्त जिंदगी को प्रभावित किया है। उड़ानों में रुकावट, बढ़ते खर्च और क्षेत्र में अनिश्चितता की वजह से कई परिवारों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं।

युद्ध के बीच मेडिकल संकट 

NDTV के मुताबिक, थिलककुमार जलथु अनिरुथररा और उनकी पत्नी शामिनी रमेश करीब 8 साल पहले तमिलनाडु से दुबई आए थे, ताकि बेहतर जिंदगी बना सकें। लेकिन अब वे एक बड़े संकट से जूझ रहे हैं।


थिलक्कुमार की मां उनसे मिलने दुबई आई थीं, लेकिन अचानक उन्हें गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण हो गया। पिछले 40 दिनों से वह अस्पताल के ICU में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें कम से कम दो महीने और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ेगी।

थिलक्कुमार के मुताबिक, उनकी मां ने अकेले ही बहुत संघर्ष करके उन्हें पाला था। अब वह अस्पताल के बिस्तर पर हैं और उनके इलाज का भारी खर्च उठाना परिवार के लिए लगभग नामुमकिन हो गया है।

अस्पताल का खर्च बहुत ज्यादा है। रोज का बिल करीब 3 लाख रुपए है, जिसमें स्कैन या खास इलाज का खर्च शामिल नहीं है। अब तक कुल बिल करीब 1.25 करोड़ रुपए हो चुका है और हर दिन लगभग 4 लाख रुपए और बढ़ रहा है।

भारत लाने में आ रही बड़ी परेशानी

बढ़ते खर्च को देखते हुए दंपति ने उन्हें इलाज के लिए भारत लाने का फैसला किया, क्योंकि वहां लंबे समय तक इलाज अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।

डॉक्टरों ने 4 मार्च को उन्हें मेडिकल एस्कॉर्ट के साथ कमर्शियल फ्लाइट से भारत ले जाने की अनुमति दे दी थी, जिसका खर्च करीब 7 लाख रुपए आता। लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण वह फ्लाइट रद्द हो गई।

अब उनके पास केवल प्राइवेट एयर एंबुलेंस का विकल्प बचा है। लेकिन मौजूदा हालात के कारण इसका खर्च करीब सात गुना बढ़कर लगभग 50 लाख रुपए हो गया है।

थिलक्कुमार का कहना है कि वे साधारण नौकरीपेशा लोग हैं और इतना बड़ा खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं है। फिलहाल उन्हें अपनी मां को भारत लाने के लिए तुरंत 50 लाख रुपए की जरूरत है।

अस्पताल से छुट्टी के समय उन्हें पूरा बिल चुकाना होगा। उन्हें उम्मीद है कि अस्पताल कुछ छूट देगा, लेकिन वह भी ज्यादा से ज्यादा 10 से 15 लाख रुपए तक ही हो सकती है। दंपति दुबई की चैरिटी संस्थाओं से भी मदद मांग रहे हैं।

शामीनी का कहना है कि अगर पैसे का इंतजाम हो भी जाए, तब भी एयर एंबुलेंस मिलना मुश्किल है, क्योंकि मौजूदा हालात में उनकी उपलब्धता बहुत कम हो गई है।

उन्होंने कहा कि एयर एंबुलेंस बुक करने के लिए पहले से स्लॉट लेना पड़ता है और अभी स्थिति के कारण ऐसे स्लॉट मिलना बेहद मुश्किल हो गया है।

थिलक्कुमार और शामीनी के लिए समय तेजी से निकल रहा है। शामीनी कहती हैं कि आठ साल में उन्होंने कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था और अब यह संकट भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह से संभालना बेहद कठिन हो गया है।

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