पाकिस्तान कितना धोखेबाज है, इसका एक और नया उदाहरण सामने आ गया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को अटारी-वाघा क्रॉसिंग पर फंसा दिया है। पड़ोसी देश ने वाघा बॉर्डर को पूरी तरह से बंद कर दिया और अपने ही लोगों को देश में घुसने से रोक दिया। पाकिस्तानियों को राहत देते हुए भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को उचित दस्तावेजों के साथ भारत छोड़ने की समयसीमा बढ़ा दी है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने आज दोनों देशों के बीच अटारी-वाघा सीमा क्रॉसिंग प्वाइंट को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
भारत ने 30 अप्रैल से सीमा बंद करने की घोषणा की थी, हालांकि, उसने पाकिस्तानी नागरिकों को अगली सूचना तक लौटने की अनुमति दी। न्यूज एजेंसी PTI को सूत्रों ने बताया कि सीमा बंद होने के कारण गुरुवार को दोनों देशों से कोई भी व्यक्ति दूसरी तरफ नहीं गया।
पाकिस्तान में विवाहित दो भारतीय बहनों ने सीमा पार करने की कोशिश की, लेकिन वाघा बॉर्डर बंद होने के कारण उन्हें पाकिस्तान में प्रवेश नहीं दिया गया।
उनमें से एक महिला ने रोते हुए कहा, "कोई मुझे सीमा पार करवा दे। मुझे अपने बच्चे के पास जाना है। हमारा क्या दोष है? जो लोग हमें हमारे बच्चों से अलग कर रहे हैं, मैं प्रार्थना करती हूं कि वे अपने बच्चों से अलग हो जाएं।" महिला ने इस सब के लिए जिम्मेदार लोगों को कोसा।
दूसरी बहन ने कहा, "कौन सा कानून माता-पिता को उनके बच्चों से अलग करता है? मेरे बच्चे वहां रो रहे हैं, मुझे वहां जाना है।"
सुबह से ही सीमा पार करने के इच्छुक पाकिस्तानी नागरिक फंस गए और दुखी हो गए, क्योंकि उनके अपने ही देश ने उन्हें अपनी धरती पर दोबारा प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
मोहम्मद शरीक, जिनकी बहनों की कराची में शादी हुई उन्होंने ने कहा "मैं अपनी बहनों के साथ सुबह 6 बजे यहां आया था। बॉर्डर सुबह 10 बजे खुलता है। सुबह 11 बजे, हमने अधिकारियों से पूछा, और उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने आदेश दिया है और हम यहां से लोगों को भेज रहे हैं, लेकिन वे (पाकिस्तानी पक्ष) उन्हें आदेश पार करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। हम अभी भी यहां इंतजार कर रहे हैं।"
बुधवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए 125 पाकिस्तानी नागरिक भारत से चले गए, जिससे एक हफ्ते में कुल 911 लोग भारत से चले गए। पाकिस्तानी वीजा वाले 15 भारतीय भी पाकिस्तान में घुसे, जिससे यह संख्या 23 हो गई।
इस बीच, पंजाब की अमृतसर सीमा के जरिए 152 भारतीय और 73 पाकिस्तानी नागरिक लॉन्ग टर्म के भारतीय वीजा के साथ भारत में दाखिल हुए, जिनकी कुल संख्या क्रमशः 1,617 और 224 थी। ये गतिविधियां 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार के आदेश के बाद की गई हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।