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'मेरा पति नपुंसक है' पत्नी ने मांगा 90 लाख रुपए गुजारा भत्ता, हाई कोर्ट ने कहा- ऐसा कोई कोई सबूत नहीं है

महिला ने दावा किया कि उसके पति को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है और वह यौन संबंध बनाने में असमर्थ है। साथ ही, उसने विवाह को अमान्य करने, क्रूरता करने और 90 लाख रुपए के स्थायी गुजारा भत्ते की मांग की है। जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की बेंच ने उनकी अपील खारिज कर दी

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 26, 2025 पर 3:30 PM
'मेरा पति नपुंसक है' पत्नी ने मांगा 90 लाख रुपए गुजारा भत्ता, हाई कोर्ट ने कहा- ऐसा कोई कोई सबूत नहीं है
'मेरा पति नपुंसक है' पत्नी ने मांगा 90 लाख रुपए गुजारा भत्ता (FILE PHOTO)

एक महिला ने तेलंगाना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर तलाक और 90 लाख रुपए गुजारा भत्ता मांगा है। उसने इस आधार पर ये मांग की कि उसका पति "नपुंसक" है। हालांकि, हाई कोर्ट ने महिला की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जो ये साबित कर सके उसका पति नपुंसक है या उसने शादी के नाम पर उससे कोई धोखाधड़ी की है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने दावा किया कि उसके पति को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है और वह यौन संबंध बनाने में असमर्थ है। साथ ही, उसने विवाह को अमान्य करने, क्रूरता करने और 90 लाख रुपए के स्थायी गुजारा भत्ते की मांग की है।

जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की बेंच ने उनकी अपील खारिज कर दी।

अदालत ने पिछले महीने दिए अपने फैसले "अपील करने वाली महिला यह साबित नहीं कर पाई कि उसका पति नपुंसक है, यौन संबंध बनाने में असमर्थ है या उसने उसे प्रताड़ित किया। वह यह भी साबित नहीं कर सकी कि उसे ₹90 लाख स्थायी गुजारे भत्ते का हक है। इसलिए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।"

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