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Supreme Court: 'कोई भी महिलाओं को नौकरी नहीं देगा...' सुप्रीम कोर्ट ने 'पीरियड लीव' वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Supreme Court: भारत की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें पूरे देश में महिला छात्रों और कर्मचारियों को मासिक धर्म (पीरियड) के दौरान छुट्टी देने की नीति बनाने की मांग की गई थी।

Translated By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Mar 13, 2026 पर 1:59 PM
Supreme Court: 'कोई भी महिलाओं को नौकरी नहीं देगा...' सुप्रीम कोर्ट ने 'पीरियड लीव' वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने 'पीरियड लीव' वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Supreme Court: भारत की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें पूरे देश में महिला छात्रों और कर्मचारियों को मासिक धर्म (पीरियड) के दौरान छुट्टी देने की नीति बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी अनिवार्य नीति लगाने से अनजाने में लिंग से जुड़ी पुरानी सोच बढ़ सकती हैं और महिलाओं की नौकरी पाने की संभावना पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारी याचिकाकर्ता के आवेदन की जांच कर सकते हैं और संबंधित पक्षों से सलाह करने के बाद मासिक धर्म अवकाश (menstrual leave) पर नीति बनाने की संभावना पर विचार कर सकते हैं।

न्यायालय ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए अधिकारियों को निवेदन पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि इसे एक अनिवार्य अधिकार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। लेकिन नियोक्ता के बारे में भी सोचना चाहिए जिसे पेड लीव देना होता है।” बता दें कि यह याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी।

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