Pakistani Spy: ज्योति से पहले भारत की डिप्लोमेट माधुरी गुप्ता निकली थी डबल एजेंट, पाकिस्तान ने हनीट्रैप से बनाया था शिकार, जानें पूरी कहानी
यह 2010 की शुरुआत की बात है, 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बमुश्किल डेढ़ साल बाद, जब इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में एक जासूस की खबर तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ राजीव माथुर तक पहुंची। ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल ही रहा था, एक और इंटेलिजेंस फेलियर एक ऐसा जोखिम था, जिसे भारत बर्दाश्त नहीं कर सकता था
Pakistani Spy: ज्योति से पहले भारत की डिप्लोमेट माधुरी गुप्ता निकली थी डबल एजेंट
हाल ही में पाकिस्तान को मिलिट्री सीक्रेट लीक करने के आरोप में यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी ने एक बार देश में छिपा दुश्मनों के जासूसों को लेकर एक चिंता खड़ी कर दी है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत ने पहले भी इसी तरह का विश्वासघात देखा था। 15 साल पहले, सिस्टम के भीतर से ही एक और महिला, एक चौंकाने वाले जासूसी मामले के केंद्र में थी। इस्लामाबाद में तैनात मिड लेवल की राजनयिक माधुरी गुप्ता पर पाकिस्तान की कुख्यात इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के लिए गुप्त रूप से काम करने का आरोप लगाया गया था।
यह 2010 की शुरुआत की बात है, 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बमुश्किल डेढ़ साल बाद, जब इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में एक जासूस की खबर तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ राजीव माथुर तक पहुंची। ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल ही रहा था, एक और इंटेलिजेंस फेलियर एक ऐसा जोखिम था, जिसे भारत बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
इंटरनल अलर्ट में जो नाम सामने आया वह माधुरी गुप्ता का था, जो ग्रेड-B भारतीय विदेश सेवा अधिकारी और इस्लामाबाद में सेकंड सेक्रेटरी (प्रेस एंड इफॉर्मेशन) थीं।
उर्दू में अपनी विद्वता और सूफीवाद और कविता में गहरी रुचि के लिए जानी जाने वाली गुप्ता की प्रोफाइल किसी डबल एजेंट से बिलकुल मेल नहीं खाती। लेकिन लीक की गई जानकारी ने एक अलग कहानी बयां की।
जब शुरुआती इंटेलिजेंस इनपुट से गुप्ता की संदिग्ध गतिविधियों का संकेत मिला, तो राजीव माथुर ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख केसी वर्मा और गृह सचिव जीके पिल्लई को इसकी जानकारी दी।
SAARC समिट के बहाने से दिल्ली बुलाया
चिंताओं के बावजूद, निगरानी को दो और सप्ताह तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान, कथित तौर पर उसे प्लांटेड जानकारी दी गई, जो लीक होने पर उसके पास वापस आ गई।
गुप्ता को बिछाए गए इस जाल की जानकारी नहीं थी। उन्हें उसी साल बाद में भूटान में होने वाले SAARC शिखर सम्मेलन के लिए मीडिया रिलेशंस में मदद करने के बहाने दिल्ली बुलाया गया।
वह 21 अप्रैल 2010 को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचीं, पश्चिमी दिल्ली में अपने घर पर रात बिताई और अगली सुबह विदेश मंत्रालय कार्यालय पहुंचीं।
वहां, साउथ ब्लॉक में, पहले से ही दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को बुलाया लिया गया था। कुछ ही मिनटों में, भारतीय विदेश सेवा की ग्रेड-B अधिकारी गुप्ता को पाकिस्तान की ISI को डिफेंस से जुड़ी खुफिया जानकारी लीक करने के आरोप में हिरासत में ले लिया गया।
पाकिस्तान में रॉ एजेंट के खोल दिए राज
उसे 22 अप्रैल 2010 को ऑफिशियल सेक्रेट्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ताओं ने कहा कि उसने पाकिस्तान में तैनात भारतीय इंटेलिजेंस अधिकारियों के राज खोल दिए थे। उस समय की रिपोर्टों में "आधिकारिक सूत्रों" के हवाले से कहा गया था कि इस्लामाबाद में रॉ स्टेशन हेड आर.के. शर्मा की जांच चल रही है, जिससे उनका राज खुल गया। उन्होंने एक काउंसलर के तौर पर राजनयिक कवर के तहत काम किया था।
जांच अधिकारी पंकज सूद ने कहा, "उसने पाकिस्तान में सभी भारतीय खुफिया अधिकारियों के राज खोल दिए थे, उच्चायोग के हर एक कर्मचारी के बायोग्राफिकल डिटेल का खुलासा कर दिया था, और 'भारत के कुछ सीक्रेट रूट्स' के बारे में भी बता दिया था।"
2012 के कारवां के एक लेख में कहा गया था, "शर्मा की इस्लामाबाद में आधिकारिक सुरक्षा को उनके अपने देश की तरफ से उजागर कर दिया गया था, ऐसा लग रहा था कि इस कदम से पाकिस्तान में रॉ के ऑपरेशन को नुकसान पहुंचेगा और उनका कार्यभार जल्द और अपमानजनक तरीके से खत्म हो जाएगा।"
हनीट्रैप का शिकार हुई थी माधुरी
माधुरी गुप्ता किस वजह से फंसी? जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि वह हनीट्रैप का शिकार थी। जांच अधिकारी पंकज सूद ने द कारवां से बात करते हुए कहा, "उन्होंने एक युवक को उसके सामने फेंका और वह फंस गई।"
वह युवक जमशेद उर्फ जिम था, जो 30 साल का एक पाकिस्तानी जासूस था, जो उसकी उम्र का आधा था, जिसे गुप्ता को बहकाने और संवेदनशील जानकारी निकालने का काम सौंपा गया था।
एक और हैंडलर, मुदस्सर रजा राणा, जो पाकिस्तान के तत्कालीन आंतरिक मंत्री रहमान मलिक का बैचमेट था, वो ही इस ऑपरेशन को कॉर्डिनेट कर रहा था।
उन्होंने सबसे पहले एक महिला पत्रकार के जरिए उससे संपर्क किया और आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर की एक दुर्लभ किताब ढूंढने में उसकी मदद करके उसका विश्वास जीत लिया।
कथित तौर पर, इस्लामाबाद में उसके घर में लगे कंप्यूटर और ब्लैकबेरी फोन के जरिए गुप्ता दोनों व्यक्तियों के साथ लगातार संपर्क में रहीं।
जांच में यह भी पता चला कि गुप्ता, जमशेद से बहुत प्रभावित थी और उसने इस्लाम अपनाने, उससे शादी करने और इस्तांबुल जाने की इच्छा जताई थी। उसकी बोलचाल और लहजा अक्सर सूफीवाद, रूमी और उर्दू के इर्द-गिर्द घूमता था, जिसका जमशेद ने फायदा उठाया।
गुप्ता कथित तौर पर राणा के निर्देश पर मार्च 2010 में जम्मू-कश्मीर गई थीं। माना जाता है कि वहां उन्होंने राज्य की वार्षिक योजना रिपोर्ट और प्रस्तावित 310 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने की कोशिश की थी।
आरोपपत्र के अनुसार, जांचकर्ताओं ने गुप्ता के लिए पाकिस्तानी एजेंटों की ओर से कथित रूप से बनाए गए दो ईमेल एड्रेस: **lastrao@gmail.com और **arao@gmail.com के जरिए आदान-प्रदान किए गए लगभग 73 ईमेल प्राप्त किए।
क्या रहा इस केस का नतीजा?
माधुरी गुप्ता पर पहली बार 2012 में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत आरोप लगाया गया था, जिसके लिए अधिकतम 14 साल की सजा का प्रावधान था। शुरुआत में, जमानत मिलने से पहले उन्होंने तिहाड़ जेल में 21 महीने बिताए।
2018 में, शहर की एक अदालत ने उन्हे दोषी पाया और आखिरकार उन्हें पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया। वह राजस्थान के भिवाड़ी में रहती थी, अपने मुकदमे का इंतजार कर रही थी और अक्टूबर 2021 में 64 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के समय सजा के खिलाफ उनकी अपील दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित थी।