लोकसभा में एक बार फिर चीन के मुद्दे पर जोरदार हंगामे देखने को मिला। दरअसल मंगलवार को दोपहर 2 बजे बाद जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठा दिया। यह विवाद तब बढ़ा, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साल 2020 में गलवान घाटी में हुई भारत-चीन झड़पों का ज़िक्र किया। वहीं लोकसभा में हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के 7 सांसदों को निलंबित कर दिया है। ये सभी सांसद बजट सत्र में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
बता दें कि विपक्षी सांसद राहुल गांधी के समर्थन में हंगामा करते हुए वेल में आ गए और आसन की तरफ पेपर भी उछाले। जोरदार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी और आसन की तरफ पेपर भी उछाले। जोरदार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी और पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
वहीं संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में हुए हंगामे और चेयर की ओर कागज़ फेंकने की घटना को लेकर कड़ा कदम उठाया गया है। इस मामले में छह विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के बाकी समय के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड किए गए सांसदों में हिबी ईडन, अमरेंद्र सिंह, राजा वारिंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला और किरण कुमार रेड्डी शामिल हैं। लोकसभा में हुए इस हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी। इसी को देखते हुए यह फैसला लिया गया, ताकि सदन की गरिमा बनी रहे और कामकाज ठीक से चल सके।
सदन में हुआ जोरदार हंगामा
बता दें कि, मंगलवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी ने अपना भाषण शुरू करते हुए मैगजीन के एक लेख का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह लेख प्रमाणित है और इसे सदन के सामने भी रखा। इस लेख में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का जिक्र किया गया था। लेख के मुताबिक, इस किताब में 2020 की गलवान घाटी झड़पों से जुड़ा एक संस्मरण शामिल है। इस मुद्दे को लेकर सदन में माहौल गरमा गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच बहस और हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सत्ताधारी पार्टी के सांसदों द्वारा टोके जाने से पहले कहा कि उन्होंने अपना भाषण एक लेख के आधार पर शुरू किया था। उन्होंने बताया कि स्पीकर ने उनसे कहा था कि बात नियमों के अनुसार होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि अब वह चाहते हैं कि उस लेख को प्रमाणित किया जाए, ताकि वे उस पर अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक बहुत अहम मुद्दा है। इसमें भारत के चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों का सवाल भी जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस लेख का उन्होंने हवाला दिया है, उसमें प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का ज़िक्र है और वह उसी पर बोलना चाहते हैं। इस दौरान सदन की कुर्सी पर बैठे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे राष्ट्रपति के अभिभाषण से जुड़े विषयों पर ही अपनी बात रखें।
हालांकि, विपक्ष के नेता राहुल गांधी उसी विषय पर अपनी बात रखते रहे। इसके बाद सदन की कुर्सी पर बैठे अधिकारी को अगला वक्ता घोषित करना पड़ा और नरेश उत्तम पटेल का नाम लिया गया। इस बीच तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके के सांसदों ने राहुल गांधी के समर्थन में बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने चेयर के फैसले का विरोध किया। कुछ सांसद स्पीकर के सामने रखी मेज पर चढ़ने की कोशिश करने लगे और चेयर की ओर कागज़ भी फेंके गए। सदन में माहौल काफी हंगामेदार हो गया।
लगातार बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोमवार को साफ कहा था कि राहुल गांधी अपने भाषण का आधार किसी अप्रकाशित किताब को नहीं बना सकते। लेकिन विपक्ष के नेता इस फैसले से सहमत नहीं हुए। नतीजतन, सदन की कार्यवाही दिन में दो बार रोकी गई और अंत में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।