प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा हाल ही में ईंधन बचत और जिम्मेदारी से संसाधनों के इस्तेमाल की अपील के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि कॉरपोरेट इंडिया, खासकर IT सेक्टर, को फिर से वर्क फ्रॉम होम मॉडल की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसका मकसद ईंधन की खपत कम करना और ऊर्जा लागत पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है।
हालांकि, सरकारी सूत्रों ने CNBC-TV18 को बताया कि IT इंडस्ट्री के लिए घर से काम करने से संबंधित कोई निर्देश या सलाह जारी करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
CNBC-TV18 के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी केवल एक अपील थी और इस स्तर पर किसी भी प्रकार के अनिवार्य प्रतिबंध पर विचार नहीं किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, आईटी सेक्टर पहले से ही जरूरत के हिसाब से रिमोट और हाइब्रिड वर्क मॉडल अपना रहा है, जिससे सरकार के किसी औपचारिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ती।
सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि सरकार की किफायत और आयात अनुशासन की व्यापक नीति के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात पर किसी भी तरह की रोक लगाने की कोई योजना नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात देश के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में होता है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि ग्लोबल मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ने की वजह से आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का मूल्य और बढ़ सकता है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि AI सर्वर भारत में तेजी से बन रहे डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए बेहद जरूरी हैं।
सूत्रों द्वारा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, FY2026 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात 116.17 अरब डॉलर रहा।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब बाजार इस बात पर करीबी नजर रख रहा है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की किफायत की अपील का असर कॉरपोरेट इंडिया के अलग-अलग सेक्टरों पर किसी तरह के व्यावहारिक कदमों के रूप में दिख सकता है या नहीं।