'सोना न खरीदें, पेट्रोल-डीजल कम यूज करें, वर्क फ्रॉम होम अपनाएं', विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पीएम मोदी की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने, एक साल तक सोना न खरीदने, विदेश यात्राएं टालने और फिर से वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की। उन्होंने वैश्विक संकट और बढ़ती महंगाई का भी जिक्र किया। जानिए डिटेल।

अपडेटेड May 10, 2026 पर 9:42 PM
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पीएम मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुए वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम को फिर से अपनाने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जनता से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एकजुट प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेशी यात्राएं टालने, खाने के तेल का इस्तेमाल घटाने और एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।

पेट्रोल-डीजल का संयम से इस्तेमाल


सिकंदराबाद में जनसभाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संघर्षों की वजह से ईंधन और उर्वरकों की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे में इसके असर को कम करने के लिए देशवासियों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने कहा, 'आज जरूरत इस बात की है कि पेट्रोल, गैस, डीजल जैसी चीजों का बहुत संयम से इस्तेमाल किया जाए। हमें आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग सिर्फ जरूरत के हिसाब से करना चाहिए। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और युद्ध का असर भी कम होगा।'

 

मेट्रो और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की सलाह

ईंधन बचत को लेकर देशव्यापी अभियान की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिन शहरों में मेट्रो नेटवर्क है, वहां लोगों को ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना चाहिए। निजी गाड़ियों पर निर्भरता कम करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, 'हमें पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल सीमित करना होगा। जिन शहरों में मेट्रो है, वहां लोगों को मेट्रो से सफर करने का फैसला लेना चाहिए। अगर कार इस्तेमाल करनी ही पड़े, तो कारपूलिंग अपनानी चाहिए।'

इलेक्ट्रिक गाड़ियों और रेलवे पर जोर

प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के ज्यादा इस्तेमाल और माल ढुलाई के लिए रेलवे परिवहन को बढ़ावा देने की भी अपील की। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों के पास इलेक्ट्रिक वाहन हैं, उन्हें उनका ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।'

वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग का सुझाव

पीएम मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुए वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम को फिर से अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, 'कोरोना काल में हमने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसी कई व्यवस्थाएं विकसित की थीं और हम इनके आदी भी हो गए थे। आज समय की मांग है कि अगर हम इन्हें फिर शुरू करें, तो यह राष्ट्रीय हित में होगा।'

उन्होंने आगे कहा, 'हमें फिर से वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देनी चाहिए। पेट्रोल और डीजल वैश्विक स्तर पर काफी महंगे हो चुके हैं, इसलिए विदेशी मुद्रा बचाने पर भी जोर देना जरूरी है।'

विदेश यात्राएं और शादियां टालने की अपील

प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से अपील करते हुए कहा कि लोग कम से कम एक साल तक विदेशी छुट्टियां, विदेश में शादियां और गैरजरूरी अंतरराष्ट्रीय यात्राएं टाल दें, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार की बचत हो सके।

उन्होंने कहा, 'विदेश में शादी करने, विदेश घूमने और छुट्टियां मनाने का चलन मध्यम वर्ग में तेजी से बढ़ रहा है। हमें तय करना चाहिए कि इस संकट के समय कम से कम एक साल तक विदेश यात्रा टालेंगे।'

एक साल तक सोना न खरीदने की सलाह

प्रधानमंत्री ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर देश की विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा खर्च होता है।

उन्होंने कहा, 'सोने की खरीदारी में भी विदेशी मुद्रा का काफी इस्तेमाल होता है। देशहित में हमें संकल्प लेना चाहिए कि चाहे घर में कितने भी कार्यक्रम हों, एक साल तक सोना नहीं खरीदेंगे।'

खाने के तेल की खपत कम करने की बात

पीएम मोदी ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और जिम्मेदार उपभोग अपनाने की भी अपील की। उन्होंने परिवारों से खाने के तेल की खपत कम करने को कहा और बताया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत दोनों को फायदा होगा।

उन्होंने कहा, 'खाने के तेल के आयात पर भी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर हर परिवार खाने के तेल का इस्तेमाल कम करे, तो यह देशभक्ति में बड़ा योगदान होगा। इससे देश के खजाने और हर परिवार के स्वास्थ्य दोनों को फायदा मिलेगा।'

प्राकृतिक खेती और सोलर पंप पर जोर

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रासायनिक उर्वरकों के बड़े पैमाने पर आयात से विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की।

उन्होंने कहा, 'हम कृषि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरक विदेशों से आयात करते हैं। हमें रासायनिक खाद का इस्तेमाल आधा करना चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और हमारी धरती भी सुरक्षित रहेगी।'

पीएम मोदी ने कृषि में डीजल पंप की जगह सोलर पंपों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने की बात कही।

ऊर्जा संकट पर सरकार का फोकस

ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की रणनीति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सोलर एनर्जी उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है और पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेडिंग के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने देशभर में LPG कवरेज बढ़ाई है, अब सस्ती पाइप्ड गैस सप्लाई पर ध्यान दिया जा रहा है और CNG आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'इन सभी प्रयासों की वजह से भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर पा रहा है।'

युद्ध और महंगाई का असर

प्रधानमंत्री ने यह भी माना कि वैश्विक संघर्षों की वजह से पेट्रोल और उर्वरकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सरकार लोगों को इसके आर्थिक असर से बचाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, 'युद्ध की वजह से पेट्रोल और उर्वरकों की कीमतें काफी बढ़ गईं। सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने से संकट से निपटने के बावजूद मुश्किलें बढ़ जाती हैं।'

देशभक्ति और जिम्मेदारी का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभक्ति सिर्फ देश के लिए जान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों में जिम्मेदारियां निभाना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने कहा, 'इस वैश्विक संकट के दौर में हमें कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए संकल्प लेना होगा और पूरी निष्ठा से उसे निभाना होगा।'

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