बांग्लादेश लिंचिंग को लेकर कोलकाता में भारी प्रदर्शन, हिंदूवादी संगठनों पर लाठीचार्ज से भड़की BJP

Kolkata protests: कोलकाता के बेकबागन में स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय के करीब पहुंचने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद बंगाल पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 7:49 PM
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Kolkata protests: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया

Protests in Kolkata: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बांग्लादेश में हिंदूओं की लिंचिंग को लेकर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार (23 दिसंबर) को हुए विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले के विरोध में एक हिंदूवादी संगठन के सैकड़ों समर्थकों ने मंगलवार दोपहर को कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायोग की ओर मार्च करने की कोशिश की। जब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका तो उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई। बीजेपी अब पुलिस कार्रवाई को लेकर भड़क गई है।

कोलकाता के बेकबागन में स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय के करीब पहुंचने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद बंगाल पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। BJP ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर पड़ोसी देश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में पुलिस और हिंदू समूहों के बीच हुई झड़पों के बाद बांग्लादेश जैसी क्रूरता करने का आरोप लगाया।

बीजेपी IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने X पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की। मालवीय ने ममता सरकार पर बांग्लादेश में सताए गए हिंदुओं के लिए न्याय की मांग करने वाली आवाजों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और बुजुर्गों सहित प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स के पीछे फंसाया गया। उनपर लाठीचार्ज किया गया। उनके साथ बदसलूकी की गई और सड़कों पर घसीटा गया।


मालवीय ने लिखा, "बांग्लादेश उप उच्चायोग के बाहर बर्बर हमला राज्य प्रायोजित गुंडागर्दी का एक सोचा-समझा कृत्य है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के किराए के गुंडों की तरह काम किया। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा से तुलना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल पुलिस कट्टरपंथी तत्वों को खुश करने के लिए इसी तरह की क्रूरता कर रही है।

12 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। झड़प में कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "बांग्लादेश उप उच्चायोग के सामने स्थिति नियंत्रण में है। वहां अवैध रूप से इकट्ठा होने की कोशिश करने वालों को हटा दिया गया है। अब तक इलाके में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों को एहतियात के तौर पर गिरफ्तार किया गया है।"

उन्होंने कहा कि विदेशी राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर के घेराव के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए उप उच्चायोग कार्यालय के पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

'हिंदू हुंकार पदयात्रा' नाम से विरोध मार्च का आयोजन 'बोंगियो हिंदू जागरण' के बैनर तले किया गया। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कथित हिंसा के खिलाफ नारे लगाते और भगवा झंडे थामे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मार्च में हिस्सा लिया।

यह मार्च सियालदह से शुरू हुआ और जब यह बांग्लादेश उप उच्चायोग कार्यालय की ओर बढ़ रहा था। तभी बेकबागन इलाके में पुलिस ने इसे रोक दिया। दर्शनकारियों ने 'हिंदू हिंदू, भाई भाई', ;बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा' के नारे लगाए।

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बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कपड़े की एक फैक्टरी में काम करने वाले 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को मैमनसिंह के बालुका में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। फिर उसके शव को आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने दास की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की।

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