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Sharad Pawar Political Journey: शरद पवार ने संसद में व्हील चेयर पर ली शपथ! 85 साल की उम्र और 68 साल का राजनैतिक सफर, यूं ही नहीं कहा जाता राजनीति का 'चाणक्य'

Sharad Pawar Political Journey: राज्यसभा में व्हील चेयर पर शपथ लेने का वाडियो सामने आने के बाद लोग शरद पवार की सेहत को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और लंबे अध्यायों में से एक है। उन्होंने 1958 में राजनीति की शुरुआत की और छह दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति की बने धुरी रहे

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Apr 08, 2026 पर 3:38 PM
Sharad Pawar Political Journey: शरद पवार ने संसद में व्हील चेयर पर ली शपथ! 85 साल की उम्र और 68 साल का राजनैतिक सफर, यूं ही नहीं कहा जाता राजनीति का 'चाणक्य'
Sharad Pawar Political Journey: शरद पवार 85 साल की उम्र में व्हील चेयर पर राज्यसभा में शपथ लेने पहुंचे

Sharad Pawar Political Journey: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने 6 अप्रैल को राज्यसभा में शपथ ली। पवार 85 साल की उम्र में व्हील चेयर पर राज्यसभा में शपथ लेने पहुंचे, जिसकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग उनकी सेहत को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और लंबे अध्यायों में से एक है।

उन्होंने 1958 में राजनीति की शुरुआत की और छह दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति की बने धुरी रहे। इसलिए उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का 'चाणक्य' भी कहा जाता है। शरद पवार की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वह विपरीत परिस्थितियों में भी सत्ता के केंद्र में बने रहना जानते हैं।

12 दिसंबर, 1940 को सतारा के पास बारामती के एक छोटे से गांव में जन्मे शरद पवार इस वक्त 85 साल के हैं। लेकिन राजनीति के लिए उनका जोश कम नहीं हुआ है। शरद पवार ने 1956 में एक स्टूडेंट के तौर पर अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत की। गोवा के आजाद होने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के प्रवरनगर तक एक प्रदर्शन मार्च निकाला, जो राजनीति में करियर की ओर उनका पहला कदम था।

1958 में शरद पवार कांग्रेस की यूथ विंग में शामिल हो गए। 1962 में कांग्रेस में शामिल होने के सिर्फ चार साल बाद उन्हें पुणे जिले में यूथ यूनिट का प्रेसिडेंट बनाया गया। यह पद उन्होंने कई सालों तक संभाला। शरद पवार कई सालों तक पार्टी से जुड़े रहे। वह कांग्रेस की यूथ विंग में कई अहम पदों पर रहे। इमरजेंसी के बाद कांग्रेस में दो फाड़ हो गया। फिर पवार को 1978 में महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।

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