'अगर हिंदू समाज में समानता होती तो...': हिंदुओं के धर्मांतरण पर सिद्धारमैया के बयान पर बवाल

Siddaramaiah Sparks Row: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि अगर हिंदू समुदाय में समानता होती, तो धर्मांतरण नहीं होता। CM ने कहा कि कुछ लोग व्यवस्था के कारण धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। अगर हिंदू समाज में समानता और समान अवसर होते, तो धर्म परिवर्तन क्यों होता? छुआछूत क्यों आई?

अपडेटेड Sep 15, 2025 पर 7:12 PM
Story continues below Advertisement
Siddaramaiah Sparks Row: सिद्धारमैया ने कहा कि अगर हिंदू समाज में समानता और समान अवसर होते, तो धर्म परिवर्तन क्यों होता?

Siddaramaiah Sparks Row: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हिंदुओं के धर्मांतरण पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर हिंदू समुदाय में समानता होती, तो धर्मांतरण नहीं होतासिद्धारमैया ने यह टिप्पणी बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए की। एक सवाल के जवाब में सिद्धारमैया ने मैसूर में कहा, "कुछ लोग व्यवस्था के कारण धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। अगर हिंदू समाज में समानता और समान अवसर होते, तो धर्म परिवर्तन क्यों होता? छुआछूत क्यों आई?"

मुसलमानों और ईसाइयों में असमानता के बारे में पूछे जाने पर सिद्धारमैया ने आगे कहा, "जहां कहीं भी असमानता है- चाहे वह मुसलमानों में हो या ईसाइयों में, न तो हमने और न ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोगों से धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा है। लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है। यह उनका अधिकार है।" मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने उन्हें मुसलमानों से समानता के मुद्दे पर सवाल उठाने की चुनौती दी है।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने हिंदू धर्म पर की गई इस टिप्पणी के लिए सिद्धारमैया पर निशाना साधा। 'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पूछा, "जब समानता की बात आती है, तो आप हमेशा हिंदू धर्म को निशाना बनाते हैं... है ना मुख्यमंत्री सिद्धारमैया? क्या आपमें समानता के मुद्दे पर मुसलमानों से सवाल करने का साहस है?"


बीजेपी नेता ने कहा कि कई महान सुधारकों ने हिंदू समाज को बदलने के लिए काम किया है। लेकिन इस्लाम में कट्टरवाद और जिहादी मानसिकता पर कभी सवाल नहीं उठाया गया या उसे सुधारा नहीं गया। अशोक ने कहा, "भले ही सुधारक उभरे हों, लेकिन मुसलमानों ने कभी इस तरह के बदलाव को स्वीकार नहीं किया है।"

वहीं, कर्नाटक बीजेपी प्रमुख बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि सिद्धारमैया की राजनीतिक विचारधारा केवल हिंदू धर्म और हिंदू रीति-रिवाजों को बदनाम करने और अन्य धर्मों के अनुयायियों को खुश करने के लिए है। उन्होंने पूछा, "हिंदू धर्म में असमानता की बात करने वाले मुख्यमंत्री इस्लाम के विरोधाभासों, महिलाओं के शोषण और धर्म को देश से पहले रखने के अपने सिद्धांत पर सवाल क्यों नहीं उठाते या उठाते?"

कर्नाटक के मंत्री की सफाई

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने सोमवार को कहा कि सिख, जैन, बौद्ध और लिंगायत धर्म सभी भारत में अलग धर्म के रूप में पैदा हुए, क्योंकि हिंदू धर्म ने समाज के कुछ वर्गों को सम्मानजनक जगह नहीं दी। खड़गे भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की आलोचना किए जाने पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

खड़गे ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि विजयेंद्र और रवि भारत में धर्म के इतिहास से अवगत हैं। सिख धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और लिंगायत धर्म सभी भारत में एक अलग धर्म के रूप में पैदा हुए थे। ये सभी धर्म भारत में इसलिए पैदा हुए क्योंकि हिंदू धर्म में उनके लिए जगह नहीं थी। इसने उन्हें सम्मानजनक स्थान नहीं दिया।"

उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए पूछा, "चतुर्वर्ण व्यवस्था क्या है? क्या यह किसी अन्य धर्म में है? यह केवल हिंदू धर्म में है। बाबासाहेब आंबेडकर ने नारा दिया था कि हिंदू के रूप में पैदा होना मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं हिंदू के रूप में नहीं मरूंगा। क्यों? वर्ण व्यवस्था के कारण।"

ये भी पढ़ें- PM Modi Bihar Visit: पीएम मोदी ने पूर्णिया एयरपोर्ट का किया उद्घाटन! बिहार को दी ₹36,000 करोड़ की सौगात, RJD-कांग्रेस पर बरसे

खड़गे ने कहा, "लोगों के पास गरिमा नहीं थी, विभिन्न जातियां व्यवस्था से अलग-थलग महसूस करती थीं। भारत में जितने भी धर्म पैदा हुए हैं, वे सभी इस असमानता के खिलाफ पैदा हुए हैं। मुझे नहीं लगता कि इन लोगों (BJP नेताओं) को पता है कि यह क्या है"

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।