Monsoon 2026: Skymet ने जारी किया फोरकास्ट! इस साल मानसून रहेगा कमजोर, जानें- किस महीने कितनी होगी बारिश?

Monsoon 2026: स्काईमेट वेदर ने साल 2026 के लिए भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपना पूर्वानुमान जारी कर दिया है। स्काईमेट के अनुसार, इस साल मानसून 'सामान्य से कम' रहने की संभावना है। और जून से सितंबर तक औसत लंबी अवधि की बारिश (LPA) का लगभग 94% ही हो सकती है।

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 4:37 PM
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Skymet ने जारी किया फोरकास्ट! इस साल मानसून रहेगा कमजोर

Monsoon 2026: स्काईमेट वेदर ने 2026 के लिए भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान जारी किया है। स्काईमेट के अनुसार, इस साल का मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना है। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि जून से सितंबर के दौरान दीर्घावधि औसत औसत (LPA) का 94% बारिश हो सकती है।

भारत में पिछले साल सामान्य से अधिक बारिश हुई, जो LPA की तुलना में 7.9% अधिक थी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी भारत में पिछले साल 747.9 mm बारिश दर्ज की गई। यह 2001 के बाद से सबसे अधिक बारिश थी और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक वर्षा थी। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में पिछले साल 1901 के बाद से दूसरी सबसे कम वर्षा दर्ज की गई।

Skymet के अनुसार, इस साल मानसून के सामान्य से कम (LPA के 90% से 95% के बीच) रहने की 40% संभावना है, सूखे की 30% संभावना (LPA के 90% से कम) है, सामान्य मानसून की 20% संभावना (LPA के 96% से 104% के बीच) है और सामान्य से अधिक मानसून की 10% संभावना (LPA के 105% से 110% के बीच) है। मानसून के चार महीनों (जून से सितंबर) के लिए LPA 868.6 mm है।


Skymet की जानकारी के मुताबिक, “मानसून का फैलाव सामान्य से कम है, जो LPA का 90-95% है। जनवरी 2026 के अपने पहले के पूर्वानुमान में, Skymet ने मानसून 2026 को कमजोर बताया था और अब भी यही अनुमान बरकरार है।”

अल नीनो का साया और कमजोर मानसून की आशंका

स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल से सक्रिय 'ला नीना' की स्थिति अब समाप्त हो रही है और प्रशांत महासागर अब 'ईएनएसओ-न्यूट्रल' (ENSO-neutral) की ओर बढ़ रहा है।

महीने के अनुसार कैसा रहेगा बारिश का हाल?

स्काईमेट ने मानसून के चार महीनों के लिए अलग-अलग अनुमान पेश किए हैं:

स्काईमेट वेदर के अनुमानों के अनुसार, जून में बारिश वार्षिक औसत वर्षा (LPA) का 101% (जून के लिए LPA 165.3 mm है), जुलाई में 95% (जुलाई के लिए LPA 280.5 mm है), अगस्त में 92% (अगस्त के लिए LPA 254.9 mm है) और सितंबर में 89% (सितंबर के लिए LPA 167.9 mm है) रहने की संभावना है।

किन राज्यों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

स्काईमेट के अनुसार, देश के मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी हो सकती है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अगस्त और सितंबर के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, देश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बाकी भारत की तुलना में बेहतर बारिश की उम्मीद है।

पूर्वानुमान के प्रमुख बिंदु

  • कुल बारिश का अनुमान: 868.6 मिमी (LPA) का 94%।
  • सूखे की आशंका: स्काईमेट ने 30% संभावना जताई है कि देश को सूखे का सामना करना पड़ सकता है।
  • सामान्य बारिश की संभावना: सामान्य बारिश होने की संभावना केवल 20% है।
  • IOD का प्रभाव: ENSO के अलावा, भारतीय महासागर डिपोल (IOD) भी मॉनसून की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। सीजन के दौरान एक मजबूत पॉजिटिव IOD इवेंट अल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को आंशिक रूप से कम कर सकता है। IOD इस साल न्यूट्रल या हल्का पॉजिटिव रहने की संभावना है, जो मॉनसून की अच्छी शुरुआत में मदद कर सकता है।

किसानों की चिंता बढ़ी

स्काईमेट की इस रिपोर्ट ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि भारतीय काफी हद तक कृषि मॉनसून पर निर्भर करती है, इसलिए अगर अगस्त और सितंबर में बारिश कम हुई तो इससे फसलों की पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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