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Sonam Wangchuk: 'जहर फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती'; सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का किया बचाव

Sonam Wangchuk: लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद 26 सितंबर को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया। इन प्रदर्शनों में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में चार लोगों की मौत हो गई थी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Feb 02, 2026 पर 5:52 PM
Sonam Wangchuk: 'जहर फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती'; सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का किया बचाव
Sonam Wangchuk: सरकार ने कहा कि सोनम वांगचुक को जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग करके जहर फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती

Sonam Wangchuk: केंद्र सरकार ने सोमवार (2 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लेने का बचाव किया। सरकार ने तर्क दिया कि उनके बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सोनम वांगचुक को जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग करके जहर फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र को ठप करने से रोकना जरूरी है। केंद्र ने वांगचुक के उन बयानों पर सवाल उठाया। इसमें उन्होंने दावा किया था कि हर क्षेत्र को यह तय करने का अधिकार है कि वह किससे संबंधित है। साथ ही जनमत संग्रह और रेफरेंडम की वकालत की थी। मेहता ने पूछा कि क्या ऐसे बयान NSA लगाने के लिए सही मामला नहीं बनाते हैं।

सोनम वांगचुक को हिरासत का बचाव करते हुए केंद्र ने शीर्ष अदालत के सामने पूछा, "क्या वांगचुक चाहते हैं कि लद्दाख नेपाल और बांग्लादेश बन जाए?" सॉलिसिटर जनरल ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक युवाओं को आत्मदाह के लिए उकसा रहे थे। केंद्र ने अदालत से कहा, "वह जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग कर रहे हैं।" साथ ही तर्क दिया कि ऐसे कामों की इजाजत नहीं दी जा सकती।

न्यूज 18 के मुताबिक, सशस्त्र बलों के बारे में सोनम वांगचुक की टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए मेहता ने कहा, "वह पाकिस्तान और चीन से घिरी जगह पर बैठकर कह रहे हैं कि भारतीय सेना कमजोर है?" केंद्र ने कहा कि ऐसे बयान बहुत आपत्तिजनक हैं।

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