स्टारलिंक ने भारत में टेस्टिंग के लिए इक्विपमेंट आयात करने की मंजूरी मांगी, सेवाएं शुरू होने में लग सकते हैं 1-2 महीने

ट्रायल के लिए कंपनी को भारत के अंदर अपना गेटवे लगाना होगा। इसके लिए सरकार कंपनी को प्रोविजनल स्पेक्ट्रम जारी करेगी। कंपनी को सभी एजेंसियों को सेवाओं का टेस्ट करना होगा। कंपनी को इसी हफ्ते इन-स्पेस से मंजूरी मिल सकती है। सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनी को 1-2 महीने लग सकते हैं

अपडेटेड Jul 02, 2025 पर 1:57 PM
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भारत में स्टारलिंक का ट्रायल जल्द शुरू हो सकता है। इसके लिए कंपनी ने उपकरण आयात करने की मंजूरी मांगी है

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने भारत में टेस्टिंग के लिए इक्विपमेंट आयात करने की मंजूरी मांगी है। इक्विपमेंट आने के बाद सरकार कंपनी को ट्रायल के लिए प्रोविजनल स्पेक्ट्रम देगी । कब शुरू होगा ट्रायल यह बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ संवदाता असीम मनचंदा ने कहा कि भारत में स्टारलिंक का ट्रायल जल्द शुरू हो सकता है। इसके लिए कंपनी ने उपकरण आयात करने की मंजूरी मांगी है। ट्रायल के लिए बिना ड्यूटी के उपकरण आयात संभव है।

ट्रायल के लिए कंपनी को भारत के अंदर अपना गेटवे लगाना होगा। इसके लिए सरकार कंपनी को प्रोविजनल स्पेक्ट्रम जारी करेगी। कंपनी को सभी एजेंसियों को सेवाओं का टेस्ट करना होगा। कंपनी को इसी हफ्ते इन-स्पेस से मंजूरी मिल सकती है। सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनी को 1-2 महीने लग सकते हैं।

इससे पहले स्पेसएक्स को स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में ऑपरेट करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट का लाइसेंस मिल चुका है। अब उसे सिर्फ IN-SPACe के अप्रूवल का इंतजार है। स्टारलिंक तीसरी कंपनी है जिसे भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ऑपरेट करने का लाइसेंस मिला है। इससे पहले वनवेब और रिलायंस जियो को मंजूरी मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टारलिंक भारत में 840 रुपए में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा देगा। हालांकि आधिकारिक तौर पर मस्क की कंपनी ने इसकी जानकारी नहीं दी है।


बता दें कि स्टारलिंक, स्पेसएक्स का प्रोजेक्ट है। यह सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट देता है। इसके सैटेलाइट्स पृथ्वी के करीब घूमते हैं, जिससे इंटरनेट तेज और स्मूथ चलता है। ये खासकर उन इलाकों के लिए फायदेमंद है, जैसे गांव या पहाड़, जहां आम इंटरनेट नहीं पहुंचता।

इस बीच स्टारलिंक के एक अधिकारी ने बताया है कि उन्हें अभी भी कई प्रोसेस पूरे करने होंगे, जिसमें गेटवे स्थापित करना, एक नेटवर्क ऑपरेशंस सेंटर, और कानूनी इंटरसेप्शन क्षमताओं को सुनिश्चित करना शामिल है। भारत में कमर्शियल उपग्रह संचार सेवाएं शुरू करने में उन्हें अभी थोड़ा और समय लग सकता है।

 

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