पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 साल के बाद एक बड़ा परिवर्त होने जा रहा है। सूबे की सत्ता से 15 साल के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी बाहर हो गई है तो वहीं भापजा पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाने जा रही है। वहीं शुक्रवार 8 मई को सूबे के नए मुख्यमंत्री के नाम का भारतीय जनता पार्टी ने ऐलान कर दिया। शुक्रवार को कोलकाता पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह ने आज भाजपा विधानमंडल दल की बैठक के बाद उनके नाम का ऐलान किया। ममता बनर्जी को बंगाल की सत्ता से बाहर करने वाले सुवेंदु अधिकारी एक समय उनके भरोसेमंद सहयोगी हुआ करते थे।
नंदीग्राम के हीरो बने थे सुवेंदु अधिकारी
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने 2011 के विधानसभा चुनाव में 34 सालों के वाममोर्चा सरकार को हटा कर बंगाल में मां, माटी, मानुष की सरकार बनाने में सफलता हासिल की थी। ममता बनर्जी के बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के पीछे महत्वपूर्ण योगदान नंदीग्राम आंदोलन का था। नंदीग्राम आंदोलन द्वारा ममता बनर्जी ने तत्कालीन बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। इस नंदीग्राम आंदोलन के नायक शुभेंदु अधिकारी ही थे। एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। लेकिन अब वही शुभेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी को राज्य की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
सुवेंदु अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर जिले के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी कांथी लोकसभा सीट से टीएमसी सांसद रह चुके हैं। शुभेंदु अधिकारी के पिता साल 1982 से कांथी दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस से विधायक बने थे, लेकिन बाद में वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए और तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक शुभेंदु अधिकारी हैं। सुवेंदु अधिकारी 2009 से कांथी दक्षिण सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं। उनके भाई दिवेंदु अधिकारी तमलुक लोक सभा क्षेत्र से सांसद, तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे भाई सुमेंदु अधिकारी, कांथी नगर पालिका अध्यक्ष भी थें।
2021 से जारी है राजनीतिक लड़ाई
ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच राजनीतिक मुकाबला साल 2021 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में आया, जब शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को बेहद कम वोटों के अंतर से हराया था। हालांकि उस समय तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में सरकार बना ली थी, लेकिन ममता बनर्जी की यह हार काफी अहम मानी गई थी। इसके बाद 2026 के चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा उलटफेर किया और भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को एक बार फिर चुनाव में हरा दिया।
नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराना अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी गई थी। लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने 2021 और 2026, दोनों चुनावों में उन्हें हराकर अपनी मजबूत पहचान बना ली। अब उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो सीधे ममता बनर्जी की राजनीति को चुनौती दे सकते हैं। इन जीतों का असर सिर्फ चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका बड़ा मानसिक और राजनीतिक प्रभाव भी पड़ा। इससे ममता बनर्जी की लंबे समय से बनी “अजेय नेता” वाली छवि को भी बड़ा झटका लगा।