कहते हैं राजनीति में 'स्थायी' कुछ भी नहीं होता- न कुर्सी, न रसूख और न ही वो प्रतीक जिन्हें हम अमर मान लेते हैं। तमिलनाडु की सत्ता के गलियारों से आज जो तस्वीर निकलकर सामने आई, उसने लोकतांत्रिक राजनीति के सबसे कठोर सच को एक झटके में बयां कर दिया। 2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने तमिलनाडु में दशकों पुराने द्रविड़ दुर्ग को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री की कुर्सी से एमके स्टालिन की विदाई और सचिवालय में नए चेहरों की दस्तक के साथ ही 'सफाई' का दौर शुरू हो चुका है।
