AAP से BJP में आए संदीप पाठक पर दो FIR, क्या लगाए गए आरोप? सांसद को गिरफ्तार करने दिल्ली तक आ गई पंजाब पुलिस

Sandeep Pathak FIR: बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इसे "राजनीतिक प्रतिशोध" करार दिया है। बड़ी बात ये है कि दोनों FIR उनके बीजेपी में शामिल होने के ठीक 8 दिन बाद दर्ज हुई हैं। 24 अप्रैल 2026 को संदीप पाठक सहित 7 सांसदों ने AAP छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था

अपडेटेड May 02, 2026 पर 3:41 PM
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हाल में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। सूत्रों के अनुसार, पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इन FIR के बारे में अभी कोई और जानकारी सामने नहीं आई है। इसी कड़ी में संदीप पाठक के खिलाफ हाल ही में पंजाब पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।

जानकारी के मुताबिक, संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब के दो अलग-अलग जिलों में कुल 2 FIR दर्ज की गई हैं। 2 मई को पंजाब पुलिस की एक टीम उनके दिल्ली स्थित आवास पर भी पहुंची थी, लेकिन वे वहां नहीं मिले।

केस क्यों दर्ज किए गए?


हालांकि पुलिस ने अभी तक FIR की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, इनमें कई तरह के आरोप लगाए गए हैं

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन FIR में भ्रष्टाचार और महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ी धाराएं शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

बड़ी बात ये है कि दोनों FIR उनके बीजेपी में शामिल होने के ठीक 8 दिन बाद दर्ज हुई हैं। 24 अप्रैल 2026 को संदीप पाठक सहित 7 सांसदों ने AAP छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।

‘आप’ को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात- पाठक, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिन्दर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी अपने सिद्धांतों, मूल्यों और बुनियादी आदर्शों से भटक गई है।

इन सात सांसदों में से छह पंजाब से हैं।

बाद में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भाजपा में उनके शामिल होने को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया, जिससे उच्च सदन में ‘आप’ के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इसे "राजनीतिक प्रतिशोध" करार दिया है। उनका कहना है कि जब तक पाठक AAP में थे, तब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन पार्टी बदलते ही पुलिस को सक्रिय कर दिया गया।

संदीप पाठक ने इस मामले पर कहा कि उन्हें FIR दर्ज होने की कोई जानकारी नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि अभी तक उनसे पुलिस या सुरक्षा एजेंसी ने कोई संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा, "मैंने अपना पूरा जीवन ईमानदारी और निष्ठा के साथ देश की सेवा में लगाया है। देश किसी भी पार्टी से बड़ा है और मैं कभी इसके साथ विश्वासघात नहीं करूंगा। यह विरोधियों की घबराहट का संकेत हो सकता है।"

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