Swami Avimukteshwaranand Saraswati: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित संगम में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन में जारी विवाद के बीच मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार पर हमला बोला है। सीनियर बीजेपी नेता ने मंगलवार (27 जनवरी) को कहा कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखने की नसीहत देते हुए उमा भारती ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस विवाद का कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा।
बता दें कि माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला प्रशासन और पुलिस द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद मेला प्रशासन ने उन्हें एक नोटिस भेजा था। इसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील में आदेश दिया गया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित (नियुक्त) नहीं हो सकता।
नोटिस में कहा गया था कि इससे स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है। बावजूद इसके प्रयागराज माघ मेला 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित एवं प्रदर्शित किया गया है।
इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की टीम ने प्रशासन पर शंकराचार्य और उनके शिष्यों की सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। इस विवाद का उल्लेख करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता भारती ने तीखा पोस्ट किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांग कर प्रशासन ने मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है। यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों एवं विद्वत परिषद का है।"
उमा भारती के इस पोस्ट को जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरूद्ध में देखा जाने लगा तो उन्होंने कुछ देर बाद सफाई दी।
भारती ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है। मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं। लेकिन मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं।"