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Unnao Rape Case: 'सेंगर को अदालत ने ही दोषी ठहराया है, धमकाने की कोशिश न करें', सोशल मीडिया ट्रायल पर भड़के CJI

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ CBI की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाई कोर्ट के 23 दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि POCSO अधिनियम की धारा 5 के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न का मामला नहीं बनता है, क्योंकि सेंगर इस कानून के तहत "लोक सेवक" नहीं थे

Shubham Sharmaअपडेटेड Dec 29, 2025 पर 5:28 PM
Unnao Rape Case: 'सेंगर को अदालत ने ही दोषी ठहराया है, धमकाने की कोशिश न करें', सोशल मीडिया ट्रायल पर भड़के CJI
Unnao Rape Case: 'सेंगर को अदालत ने ही दोषी ठहराया है, धमकाने की कोशिश न करें', सोशल मीडिया ट्रायल पर भड़के CJI

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें BJP से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने उन्नाव बलात्कार मामले को लेकर जनता के दबाव, मीडिया की बयानबाजी और राजनीतिकरण की कोशिशों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी परिणाम अदालत में होने वाली बहस से तय होगा, न कि जमीनी स्तर पर होने वाले जन आंदोलन या सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों से।

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ CBI की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाई कोर्ट के 23 दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि POCSO अधिनियम की धारा 5 के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न का मामला नहीं बनता है, क्योंकि सेंगर इस कानून के तहत "लोक सेवक" नहीं थे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस व्याख्या के आधार पर सवाल उठाए। कोर्ट ने POCSO कानून के तहत चुने हुए प्रतिनिधि को लोक सेवक की परिभाषा से बाहर करने के बड़े प्रभावों पर चिंता जताई।

चीफ जस्टिस ने कहा, "हमें चिंता है कि कानून के तहत एक कांस्टेबल लोक सेवक माना जाएगा, लेकिन विधायक को बाहर कर दिया जाएगा!" उन्होंने इसे "गंभीर कानूनी सवाल" बताया, जिसकी सावधानी से जांच जरूरी है।

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