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Unnao Rape Case: निष्पक्ष जांच का दावा खोखला? रेप पीड़िता को CBI ने कैसे किया निराश, कोर्ट ऑर्डर से चला पता!

Unnao Rape Case: हाई कोर्ट ने सेंगर के खिलाफ POCSO की धारा 5(C) और 6 रद्द कर दी, क्योंकि विधायक लोक सेवक नहीं है, इसलिए इन धाराओं से उम्रकैद की सजा नहीं हो सकती। CBI ने हाई कोर्ट से कानून को उसके उद्देश्य के अनुसार समझने को कहा था, लेकिन कोर्ट ने ऐसा नहीं किया

Curated By: Shubham Sharmaअपडेटेड Dec 25, 2025 पर 1:52 PM
Unnao Rape Case: निष्पक्ष जांच का दावा खोखला? रेप पीड़िता को CBI ने कैसे किया निराश, कोर्ट ऑर्डर से चला पता!
Unnao Rape Case: निष्पक्ष जांच का दावा खोखला? रेप पीड़िता को CBI ने कैसे किया निराश

उन्नाव रेप केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर बवाल मचा है। हालांकि, कोर्ट ऑर्डर पढ़ने से पता चलता है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी मामले की जांच के दौरान पीड़िता को निराश किया है। CBI ने हाई कोर्ट में माना कि सुप्रीम कोर्ट ने एक पुराने मामले में फैसला दिया था कि विधायक IPC की धारा 21 के तहत लोक सेवक नहीं है।

हाई कोर्ट ने सेंगर के खिलाफ POCSO की धारा 5(C) और 6 रद्द कर दी, क्योंकि विधायक लोक सेवक नहीं है, इसलिए इन धाराओं से उम्रकैद की सजा नहीं हो सकती। CBI ने हाई कोर्ट से कानून को उसके उद्देश्य के अनुसार समझने को कहा था, लेकिन कोर्ट ने ऐसा नहीं किया।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जब पीड़िता के परिवार ने 2019 में सेंगर पर IPC की ज्यादा गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की मांग की थी, यह कहते हुए कि वह एक लोक सेवक था, जिसने बलात्कार किया था, तब CBI ने याचिका में पीड़िता का समर्थन नहीं किया था।

तब एजेंसी ने कहा था कि पीड़िता की तरफ से लगाए नए आरोप "पूरी तरह से लागू नहीं होते"। निचली अदालत ने 2019 में याचिका खारिज कर दी थी।

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