उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में हुए सबसे बड़े मजदूर आंदोलन के बाद मजदूरों की सैलरी में बड़ा बदलाव कर दिया है। कम मजदूरी और खराब काम की हालत से नाराज होकर हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। उन्होंने नोएडा के कई महत्वपूर्ण इलाकों को पूरी तरह ठप कर दिया। इससे औद्योगिक क्षेत्र में छिपी हुई बहुत सारी समस्याएं सामने आ गईं।
आंदोलन तेजी से फैला और नोएडा के दर्जनों इंडस्ट्रियल एरिया में फैल गया। कुछ जगहों पर यह हिंसक भी हो गया। मजदूरों ने मुख्य सड़कें जाम कर दीं, कुछ जगहों पर तोड़फोड़ भी की और पुलिस से झड़पें हुईं। इस वजह से नोएडा और आस-पास के इलाकों में आम लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई। ट्रैफिक पूरी तरह जाम हो गया, बसें और लोग इधर-उधर नहीं जा पाए और दफ्तरों-दुकानों का काम भी ठप हो गया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के बाद सभी कैटेगरी के कामगारों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है। नई मजदूरी 1 अप्रैल से लागू होगी (रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव यानी जनवरी 2026 से)। यह फैसला हाई-पावर्ड कमिटी ने लिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे मंजूरी दे दी।
गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाजियाबाद में अब नई मजदूरी इस प्रकार है:
सरकार ने मजदूरों की मांग को मानते हुए ये बढ़ोतरी की है।
UP के बाकी जिलों में कितनी बढ़ी मजदूरी?
यह दरें उन लोगों के लिए हैं, जो फैक्ट्रियों, दुकानों या दूसरे व्यावसायिक संस्थानों में काम करते हैं। इन नई दरों में मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) दोनों शामिल हैं।
नोएडा-गुरुग्राम के मजदूरों के बीच सैलरी का फर्क
इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह नोएडा और गुरुग्राम के मजदूरों के बीच बढ़ता हुआ सैलरी का फर्क था। गुरुग्राम में हाल ही में सरकार की नई नीतियों के कारण मजदूरों की कमाई काफी बढ़ गई थी। नोएडा के मजदूर कह रहे थे कि वे लंबे घंटे काम करते हैं, महंगाई बढ़ रही है, लेकिन उनकी तनख्वाह सालों से नहीं बढ़ी है। यही गुस्सा कई दिनों से बढ़ रहा था और आखिरकार फूट पड़ा।
इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी तरह के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी। साथ ही एक हाई-लेवल कमिटी भी बना दी गई है जो मजदूरों की बाकी समस्याओं को देखेगी।
मजदूरी बढ़ाने के अलावा सरकार ने ओवरटाइम का पैसा, हफ्ते में छुट्टी, बोनस और फैक्ट्री में बेहतर सुविधाएं देने का भी भरोसा दिया है।